Category: Uncategorized
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मुसीबतों को मेहमान कर लिया है!
हर बार अपने दिल की बातें ज़बाँ पे लाकर, हमने मुसीबतों को मेहमान कर लिया है| राजेश रेड्डी
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चलकर नुक़सान कर लिया है!
जिन नेकियों पे चलकर अज्दाद कितने ख़ुश थे. हम ने उन्ही पे चल कर नुक़सान कर लिया है| राजेश रेड्डी
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ख़ुद को इंसान कर लिया है!
सब लोग इससे पहले कि देवता समझते, हमने ज़रा सा ख़ुद को इंसान कर लिया है| राजेश रेड्डी
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महानगर!
किसी समय हिन्दी गीत का पर्याय रहे स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी की एक लंबी कविता शेयर कर रहा हूँ| बच्चन जी का हिन्दी गीत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी की महानगर पर लिखी यह लंबी कविता, जिसमें महानगर के चरित्र का, उसकी खूबियों और…
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लौटने का सामान कर लिया है!
दुनिया में आँखें खोली हैं मूँदने की ख़ातिर, आते ही लौटने का सामान कर लिया है| राजेश रेड्डी
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जीना आसान कर लिया है!
आख़िर हटा दीं हमने भी ज़ेहन से किताबें, हमने भी अपना जीना आसान कर लिया है| राजेश रेड्डी
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अपनी पहचान कर लिया है!
लिख लिख के आँसुओं से दीवान कर लिया है, अपने सुख़न को अपनी पहचान कर लिया है| राजेश रेड्डी
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जिन पे उन्हें आँसू बहाने चाहिएँ!
बार-हा ख़ुश हो रहे हैं क्यूँ इन्ही बातों पे लोग, बार-हा जिन पे उन्हें आँसू बहाने चाहिएँ| राजेश रेड्डी
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मैंने समुद्र में अपना जाल फेंका!
आज पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया…
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फिर सपने सजाने चाहिएँ!
रोज़ इन आँखों के सपने टूट जाते हैं तो क्या, रोज़ इन आँखों में फिर सपने सजाने चाहिएँ| राजेश रेड्डी