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किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैंने!
अभी ज़िंदा हूँ लेकिन सोचता रहता हूँ ख़ल्वत में, कि अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैंने| साहिर लुधियानवी
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ज़हर ये भी पी लिया मैंने!
मोहब्बत तर्क की मैंने गरेबाँ सी लिया मैंने, ज़माने अब तो ख़ुश हो ज़हर ये भी पी लिया मैंने| साहिर लुधियानवी
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अपना हाल तिरी बेबसी से हम!
गर ज़िंदगी में मिल गए फिर इत्तिफ़ाक़ से, पूछेंगे अपना हाल तिरी बेबसी से हम| साहिर लुधियानवी
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गिला न करेंगे किसी से हम!
लो आज हमने तोड़ दिया रिश्ता-ए-उमीद, लो अब कभी गिला न करेंगे किसी से हम| साहिर लुधियानवी
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कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम!
तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम, ठुकरा न दें जहाँ को कहीं बे-दिली से हम| साहिर लुधियानवी
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शेष!
श्री गंगा प्रसाद विमल जी की पहचान मुख्यतः कथाकार, उपन्यासकार के रूप में होती है परंतु उनके कविता संकलन भी प्रकाशित हुए हैं और एक कवि की भूमिका में भी वे समान रूप से सक्रिय रहे हैं||लीजिए आज प्रस्तुत है श्री गंगा प्रसाद विमल जी की यह लंबी कविता – शेषकई बार लगता हैमैं ही…
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ख़ुद पे कोई एहसान कर लिया है!
कुछ इस तरह गुज़ारा है ज़िंदगी को हमने, जैसे कि ख़ुद पे कोई एहसान कर लिया है| राजेश रेड्डी
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हमीं ने तूफ़ान कर लिया है!
इक दिल के टूटने पर रोता है कोई इतना, झोंके को ख़ुद हमीं ने तूफ़ान कर लिया है| राजेश रेड्डी
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ज़िंदगी का अरमान कर लिया है!
अक्सर हुआ है मरने की माँग कर दुआएँ, फिर हमने ज़िंदगी का अरमान कर लिया है| राजेश रेड्डी