वो हुस्न-ज़ार उतरा तो मैंने देखा!

मैं नीम-शब आसमाँ की वुसअ’त को देखता था,
ज़मीं पे वो हुस्न-ज़ार उतरा तो मैंने देखा|

मुनीर नियाज़ी

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