
मैं नीम-शब आसमाँ की वुसअ’त को देखता था,
ज़मीं पे वो हुस्न-ज़ार उतरा तो मैंने देखा|
मुनीर नियाज़ी
A sky full of cotton beads like clouds

मैं नीम-शब आसमाँ की वुसअ’त को देखता था,
ज़मीं पे वो हुस्न-ज़ार उतरा तो मैंने देखा|
मुनीर नियाज़ी
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