
गली के बाहर तमाम मंज़र बदल गए थे,
जो साया-ए-कू-ए-यार उतरा तो मैं ने देखा|
मुनीर नियाज़ी
A sky full of cotton beads like clouds

गली के बाहर तमाम मंज़र बदल गए थे,
जो साया-ए-कू-ए-यार उतरा तो मैं ने देखा|
मुनीर नियाज़ी
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