जब ख़ुमार उतरा तो मैं ने देखा!

ख़ुमार-ए-मय में वो चेहरा कुछ और लग रहा था,
दम-ए-सहर जब ख़ुमार उतरा तो मैं ने देखा|

मुनीर नियाज़ी

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