रंग-ए-बहार उतरा तो मैंने देखा!

चमन मैं रंग-ए-बहार उतरा तो मैंने देखा,
नज़र से दिल का ग़ुबार उतरा तो मैंने देखा|

मुनीर नियाज़ी

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