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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Sep 2022

    मुझको रंज सहना आ गया!

    पी के आँसू सी के लब बैठा हूँ यूँ इस बज़्म में, दर-हक़ीक़त जैसे मुझको रंज सहना आ गया| आनंद नारायण मुल्ला

  • 20th Sep 2022

    मोती का गहना आ गया!

    तुझको अपना ही लिया आख़िर निगार-ए-इश्क़ ने, ऐ उरूस-ए-चश्म ले मोती का गहना आ गया| आनंद नारायण मुल्ला

  • 20th Sep 2022

    रुख़ पर हम को बहना आ गया!

    ज़िंदगी से क्या लड़ें जब कोई भी अपना नहीं, हो के शल धारे के रुख़ पर हम को बहना आ गया| आनंद नारायण मुल्ला

  • 20th Sep 2022

    अब जिसे दाँतों में रहना आ गया!

    सबकी सुनता जा रहा हूँ और कुछ कहता नहीं, वो ज़बाँ हूँ अब जिसे दाँतों में रहना आ गया| आनंद नारायण मुल्ला

  • 20th Sep 2022

    अब मुझको कहना आ गया!

    पूछता कोई नहीं अब मुझ से मेरा हाल-ए-दिल, शायद अपना हाल-ए-दिल अब मुझको कहना आ गया| आनंद नारायण मुल्ला

  • 20th Sep 2022

    मुझको रंज सहना आ गया!

    आरज़ू को दिल ही दिल में घुट के रहना आ गया, और वो ये समझे कि मुझको रंज सहना आ गया| आनंद नारायण मुल्ला

  • 20th Sep 2022

    मिल के बिछड़ना ज़रूर था!

    दुनिया है ये किसी का न इसमें क़ुसूर था, दो दोस्तों का मिल के बिछड़ना ज़रूर था| आनंद नारायण मुल्ला

  • 20th Sep 2022

    एक उम्र मुस्कान की!

    आज फिर से मैं अपने अत्यंत प्रिय नवगीतकार स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक सुंदर गीत शेयर कर रहा हूँ| रंजक जी के बहुत से गीत मैंने पहले भी शेयर किए हैं और उनके बारे में काफी लिखा भी है| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक सुंदर गीत – इतनी ही…

  • 19th Sep 2022

    भीड़ में भी जाए तो तन्हा दिखाई दे!

    क्या हुस्न है जमाल है क्या रंग-रूप है, वो भीड़ में भी जाए तो तन्हा दिखाई दे| कृष्ण बिहारी नूर

  • 19th Sep 2022

    अजीब शर्त है दीदार के लिए!

    कैसी अजीब शर्त है दीदार के लिए, आँखें जो बंद हों तो वो जल्वा दिखाई दे| कृष्ण बिहारी नूर

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