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ख़ुद राह बना लेगा!
पत्थर के जिगर वालो ग़म में वो रवानी है,ख़ुद राह बना लेगा बहता हुआ पानी है| बशीर बद्र
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केवल तुम – रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…
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किसने क्या लिक्खा है!
कौन पढ़ सकता है पानी पे लिखी तहरीरें,किस ने क्या लिक्खा है ये आब-ए-रवाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली
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चाँद से फूल से या!
चाँद से फूल से या मेरी ज़बाँ से सुनिए,हर जगह आप का क़िस्सा है जहाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली
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अपनी इज़्ज़त भी यहाँ!
शहर में सब को कहाँ मिलती है रोने की जगह,अपनी इज़्ज़त भी यहाँ हँसने हँसाने से रही| निदा फ़ाज़ली
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पास नहीं हैं बैल, बदरा पानी दे!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह जनगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- पास नहीं हैं बैल बदरा पानी देजालिम है ट्यूवेल बदरा पानी दे। आशा है आपको यह पसंद आएगाधन्यवाद। ******
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रात जंगल में कोई!
इस अँधेरे में तो ठोकर ही उजाला देगी,रात जंगल में कोई शम्अ जलाने से रही| निदा फ़ाज़ली