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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 16th Oct 2022

    क्या तिरे ग़म की पासबानी है!

    दिल मिरा और ये ग़म-ए-दुनिया, क्या तिरे ग़म की पासबानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 16th Oct 2022

    नौ-जवानी है नौ-जवानी है!

    उनसे ऐसे में जो न हो जाए, नौ-जवानी है नौ-जवानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 16th Oct 2022

    और अगर रोइए तो पानी है!

    ज़ब्त कीजे तो दिल है अँगारा, और अगर रोइए तो पानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 16th Oct 2022

    गो कहानी बहुत पुरानी है!

    आज भी सुन रहे हैं क़िस्सा-ए-इश्क़, गो कहानी बहुत पुरानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 16th Oct 2022

    तेरी उठती हुई जवानी है!

    सर-ब-सर ये फ़राज़-ए-मह्र-ओ-क़मर, तेरी उठती हुई जवानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 16th Oct 2022

    बे-सबब तेरी सरगिरानी है!

    हम तो ख़ुश हैं तिरी जफ़ा पर भी, बे-सबब तेरी सरगिरानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 16th Oct 2022

    दिल उसी ग़म की राजधानी है!

    दोनों आलम हैं जिसके ज़ेर-ए-नगीं, दिल उसी ग़म की राजधानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 16th Oct 2022

    लहर सागर का नहीं श्रृंगार!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी काव्य मंचों पर हिन्दी गीत को एक नई पहचान देने वाले, गीत विधा के शिखर पुरुष स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, बच्चन जी के बहुत से गीत मैंने पहले भी शेयर किए हैं और वे किसी परिचय के मोहताज़ नहीं हैं| लीजिए, आज…

  • 15th Oct 2022

    हर कहानी मिरी कहानी है!

    आप-बीती कहो कि जग-बीती, हर कहानी मिरी कहानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 15th Oct 2022

    आँख उसकी बड़ी सयानी है!

    बन के मासूम सब को ताड़ गई, आँख उसकी बड़ी सयानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

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