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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Oct 2022

    रात है नींद है कहानी है!

    कुछ न पूछो ‘फ़िराक़’ अहद-ए-शबाब, रात है नींद है कहानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 17th Oct 2022

    मातम-ए-इश्क़-ए-आँ-जहानी है!

    सूनी दुनिया में अब तो मैं हूँ और, मातम-ए-इश्क़-ए-आँ-जहानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 17th Oct 2022

    हमने इक बात आज जानी है!

    ज़िंदगी इंतिज़ार है तेरा, हमने इक बात आज जानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 17th Oct 2022

    ये भी इक अम्र-ए-आसमानी है!

    मिल गए ख़ाक में तिरे उश्शाक़, ये भी इक अम्र-ए-आसमानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 17th Oct 2022

    बूँद में भी वो बे-करानी है!

    बहर-ए-हस्ती भी जिसमें खो जाए, बूँद में भी वो बे-करानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 17th Oct 2022

    ज़िंदगी हिज्र की कहानी है!

    मुझसे कहता था कल फ़रिश्ता-ए-इश्क़, ज़िंदगी हिज्र की कहानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 17th Oct 2022

    बद-गुमानी सी बद-गुमानी है!

    कोई इज़हार-ए-ना-ख़ुशी भी नहीं, बद-गुमानी सी बद-गुमानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 17th Oct 2022

    क्या तिरी आँख की जवानी है!

    मय-कदों के भी होश उड़ने लगे, क्या तिरी आँख की जवानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 17th Oct 2022

    हर दर्पन तेरा दर्पन है!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी काव्य मंचों पर ‘गीतों के राजकुंवर’ नाम से विख्यात हुए स्वर्गीय गोपालदास नीरज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, नीरज जी ने हिन्दी गीत साहित्य और भारतीय फिल्म संगीत के लिए भी अपनी रचनाओं के माध्यम से अमूल्य योगदान किया था| लीजिए, आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपालदास…

  • 16th Oct 2022

    ख़ामुशी जिनकी तर्जुमानी है!

    ऐ लब-ए-नाज़ क्या हैं वो असरार, ख़ामुशी जिनकी तर्जुमानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

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