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मातम-ए-इश्क़-ए-आँ-जहानी है!
सूनी दुनिया में अब तो मैं हूँ और, मातम-ए-इश्क़-ए-आँ-जहानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी
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बूँद में भी वो बे-करानी है!
बहर-ए-हस्ती भी जिसमें खो जाए, बूँद में भी वो बे-करानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी
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ज़िंदगी हिज्र की कहानी है!
मुझसे कहता था कल फ़रिश्ता-ए-इश्क़, ज़िंदगी हिज्र की कहानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी
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हर दर्पन तेरा दर्पन है!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी काव्य मंचों पर ‘गीतों के राजकुंवर’ नाम से विख्यात हुए स्वर्गीय गोपालदास नीरज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, नीरज जी ने हिन्दी गीत साहित्य और भारतीय फिल्म संगीत के लिए भी अपनी रचनाओं के माध्यम से अमूल्य योगदान किया था| लीजिए, आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपालदास…
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ख़ामुशी जिनकी तर्जुमानी है!
ऐ लब-ए-नाज़ क्या हैं वो असरार, ख़ामुशी जिनकी तर्जुमानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी