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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 22nd Oct 2022

    इक रात है जो कटी नहीं है!

    इक सुब्ह है जो हुई नहीं है, इक रात है जो कटी नहीं है| अली सरदार जाफ़री

  • 22nd Oct 2022

    कुमार गंधर्व का गायन सुनते हुए!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| सर्वेश्वर जी की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं और उनके बारे में बात भी की है| लीजिए, आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की यह कविता, जिसमें उन्होंने विख्यात शास्त्रीय…

  • 21st Oct 2022

    किस क़दर आइना अकेला था!

    जो भी मिलता गले लगा लेता, किस क़दर आइना अकेला था| वसीम बरेलवी

  • 21st Oct 2022

    कौन मेरे सिवा अकेला था!

    तेरी समझौते-बाज़ दुनिया में, कौन मेरे सिवा अकेला था| वसीम बरेलवी

  • 21st Oct 2022

    मेरा दस्त-ए-दुआ’ अकेला था!

    बख़्शिश-ए-बे-हिसाब के आगे, मेरा दस्त-ए-दुआ’ अकेला था| वसीम बरेलवी

  • 21st Oct 2022

    मेरा ही रास्ता अकेला था!

    साथ तेरा न कुछ बदल पाया, मेरा ही रास्ता अकेला था| वसीम बरेलवी

  • 21st Oct 2022

    क्या मिरा तजरबा अकेला था!

    प्यार तो जन्म का अकेला था, क्या मिरा तजरबा अकेला था| वसीम बरेलवी

  • 21st Oct 2022

    इसलिए मैं बड़ा अकेला था!

    अपने अंदाज़ का अकेला था, इसलिए मैं बड़ा अकेला था| वसीम बरेलवी

  • 21st Oct 2022

    ज़रा सी बेवफ़ाई तो ज़रूरी है!

    मोहब्बत में ज़रा सी बेवफ़ाई तो ज़रूरी है, वही अच्छा भी लगता है जो वा’दे तोड़ देता है| वसीम बरेलवी

  • 21st Oct 2022

    जिसे दरिया किनारे छोड़ देता है!

    बिछड़ के तुझसे कुछ जाना अगर तो इस क़दर जाना, वो मिट्टी हूँ जिसे दरिया किनारे छोड़ देता है| वसीम बरेलवी

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