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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Dec 2022

    सीधा दिल पे निशाना लगता है!

    तिरछे तिरछे तीर नज़र के लगते हैं, सीधा सीधा दिल पे निशाना लगता है| कैफ़ भोपाली

  • 5th Dec 2022

    तेरे आगे चाँद पुराना लगता है!

    तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है, तेरे आगे चाँद पुराना लगता है| कैफ़ भोपाली

  • 5th Dec 2022

    बारिश ने उसे तोड़ गिराया होगा!

    ‘कैफ़’ परदेस में मत याद करो अपना मकाँ, अब के बारिश ने उसे तोड़ गिराया होगा| कैफ़ भोपाली

  • 5th Dec 2022

    बच्चे निकल आए होंगे!

    खेलने के लिए बच्चे निकल आए होंगे, चाँद अब उसकी गली में उतर आया होगा| कैफ़ भोपाली

  • 5th Dec 2022

    तितली को गिरा कर देखो!

    गुल से लिपटी हुई तितली को गिरा कर देखो, आँधियो तुम ने दरख़्तों को गिराया होगा| कैफ़ भोपाली

  • 5th Dec 2022

    लिक्खा था अंधेरा शायद!

    दिल की क़िस्मत ही में लिक्खा था अंधेरा शायद, वर्ना मस्जिद का दिया किस ने बुझाया होगा| कैफ़ भोपाली

  • 5th Dec 2022

    यही रीत है ऐ शाख़-ए-गुल!

    इस गुलिस्ताँ की यही रीत है ऐ शाख़-ए-गुल, तूने जिस फूल को पाला वो पराया होगा| कैफ़ भोपाली

  • 5th Dec 2022

    पड़ोसी के घर आया होगा!

    दिल-ए-नादाँ न धड़क ऐ दिल-ए-नादाँ न धड़क, कोई ख़त ले के पड़ोसी के घर आया होगा| कैफ़ भोपाली

  • 5th Dec 2022

    दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा!

    कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा, मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा| कैफ़ भोपाली

  • 5th Dec 2022

    अच्छा लगा!

    श्री रामदरश मिश्र जी ने साहित्य की लगभग सभी विधाओं में अपना योगदान किया है| उनकी कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज उनकी एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ, जो सामान्य ग़ज़लों से काफी लंबी है| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री रामदरश मिश्र जी की यह ग़ज़ल– आज धरती पर झुका आकाश…

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