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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 16th Dec 2022

    हुईं मंज़िलें तमाम!

    बेताबी-ओ-सुकूँ की हुईं मंज़िलें तमाम, बहलाएँ तुझ से छुट के तबीअ’त कहाँ कहाँ| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 16th Dec 2022

    कुछ न पूछ क़यामत कहाँ कहाँ!

    आई है कुछ न पूछ क़यामत कहाँ कहाँ, उफ़ ले गई है मुझ को मोहब्बत कहाँ कहाँ| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 16th Dec 2022

    आह! वेदना मिली विदाई!

    एक बार फिर मैं आज छायावाद युग के स्तंभ स्वर्गीय जयशंकर प्रसाद जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| हिन्दी कविता के लिए प्रसाद जी का योगदान अमूल्य है, विशेष रूप से उनके महाकाव्य- ‘कामायनी’, ‘आँसू’ आदि| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय जयशंकर प्रसाद जी की यह कविता – आह! वेदना मिली विदाईमैंने भ्रमवश…

  • 15th Dec 2022

    मैं नहीं जानता दुआ क्या है!

    जान तुम पर निसार करता हूँ, मैं नहीं जानता दुआ क्या है| मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 15th Dec 2022

    और दरवेश की सदा क्या है!

    हाँ भला कर तिरा भला होगा, और दरवेश की सदा क्या है| मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 15th Dec 2022

    जो नहीं जानते वफ़ा क्या है!

    हमको उनसे वफ़ा की है उम्मीद, जो नहीं जानते वफ़ा क्या है| मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 15th Dec 2022

    अब्र क्या चीज़ है हवा क्या है!

    सब्ज़ा ओ गुल कहाँ से आए हैं, अब्र क्या चीज़ है हवा क्या है| मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 15th Dec 2022

    शिकन-ए-ज़ुल्फ़-ए-अंबरीं क्यूँ है!

    शिकन-ए-ज़ुल्फ़-ए-अंबरीं क्यूँ है, निगह-ए-चश्म-ए-सुरमा सा क्या है| मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 15th Dec 2022

    काश पूछो कि मुद्दआ’ क्या है!

    मैं भी मुँह में ज़बान रखता हूँ, काश पूछो कि मुद्दआ’ क्या है| मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 15th Dec 2022

    या इलाही ये माजरा क्या है!

    हम हैं मुश्ताक़ और वो बे-ज़ार, या इलाही ये माजरा क्या है| मिर्ज़ा ग़ालिब

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