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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Jan 2023

    रवाँ-दवाँ हैं चमकते सराब के!

    बस तिश्नगी की आँख से देखा करो उन्हें, दरिया रवाँ-दवाँ हैं चमकते सराब* के|*मृगतृष्णा आदिल मंसूरी

  • 17th Jan 2023

    आँख में जाले थे ख़्वाब के!

    सोए तो दिल में एक जहाँ जागने लगा, जागे तो अपनी आँख में जाले थे ख़्वाब के| आदिल मंसूरी

  • 17th Jan 2023

    नक़्श उठ आए गुलाब के!

    फूलों की सेज पर ज़रा आराम क्या किया, उस गुल-बदन पे नक़्श उठ आए गुलाब के| आदिल मंसूरी

  • 17th Jan 2023

    क़तील हैं उसी ख़ाना-ख़राब के!

    वो जो तुम्हारे हाथ से आकर निकल गया, हम भी क़तील हैं उसी ख़ाना-ख़राब के| आदिल मंसूरी

  • 17th Jan 2023

    प्यास के क्षण!

    आज एक बार मैं वरिष्ठ कवि, गीतकार एवं संपादक श्री बालस्वरूप राही जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| राही जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं, राही जी का काव्य पाठ सुनना भी एक अलग प्रकार का अनुभव रहा है| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह…

  • 16th Jan 2023

    वो काँच का पैकर है!

    यूँ देखते रहना उसे अच्छा नहीं ‘मोहसिन’, वो काँच का पैकर है तो पत्थर तिरी आँखें| मोहसिन नक़वी

  • 16th Jan 2023

    देखेंगी पलट कर तिरी आँखें!

    मैं संग-सिफ़त एक ही रस्ते में खड़ा हूँ, शायद मुझे देखेंगी पलट कर तिरी आँखें| मोहसिन नक़वी

  • 16th Jan 2023

    ताज़ा ग़ज़ल और भी कह लूँ!

    मुमकिन हो तो इक ताज़ा ग़ज़ल और भी कह लूँ, फिर ओढ़ न लें ख़्वाब की चादर तिरी आँखें| मोहसिन नक़वी

  • 16th Jan 2023

    शाम का मंज़र तिरी आँखें!

    अब तक मिरी यादों से मिटाए नहीं मिटता, भीगी हुई इक शाम का मंज़र तिरी आँखें| मोहसिन नक़वी

  • 16th Jan 2023

    दिल में उतर कर तिरी आँखें!

    बोझल नज़र आती हैं ब-ज़ाहिर मुझे लेकिन, खुलती हैं बहुत दिल में उतर कर तिरी आँखें| मोहसिन नक़वी

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