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पूजा के गीत!
आज एक बार फिर से मैं अपने जमाने में काव्य मंचों पर हलचल मचाने वाले स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| रंग जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का यह गीत – पूजा के गीत नहीं…
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अंजाम जुदाई क्यूँ है!
हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यूँ है, अब तो हर वक़्त यही बात सताती है हमें| शहरयार
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आवाज़ बुलाती है हमें!
सुर्ख़ फूलों से महक उठती हैं दिल की राहें, दिन ढले यूँ तिरी आवाज़ बुलाती है हमें| शहरयार
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बज़्म में लाती है हमें!
ज़िंदगी जब भी तिरी बज़्म में लाती है हमें, ये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती है हमें| शहरयार
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अज़ल से इंतिज़ार है!
न जिसका नाम है कोई न जिसकी शक्ल है कोई, इक ऐसी शय का क्यूँ हमें अज़ल से इंतिज़ार है| शहरयार
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हर एक दिल फ़िगार है!
हर एक जिस्म रूह के अज़ाब से निढाल है, हर एक आँख शबनमी हर एक दिल फ़िगार है| शहरयार
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ग़ुबार ही ग़ुबार है!
ये क्या जगह है दोस्तो ये कौन सा दयार है, हद-ए-निगाह तक जहाँ ग़ुबार ही ग़ुबार है| शहरयार
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बहुत देर तक सोए!
लीजिए आज बार फिर से प्रस्तुत है अपने जमाने में काव्य मंचों के एक प्रमुख नाम रहे स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी की एक कविता| सरोज जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी की यह कविता – सचमुच बहुत देर तक सोएइधर यहाँ…