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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 31st Mar 2023

    खोकर जी लिया मैंने!

    उन्हें अपना नहीं सकता मगर इतना भी क्या कम है, कि कुछ मुद्दत हसीं ख़्वाबों में खोकर जी लिया मैंने| साहिर लुधियानवी

  • 31st Mar 2023

    सहारे जी लिया मैंने!

    अभी ज़िंदा हूँ लेकिन सोचता रहता हूँ ख़ल्वत में, कि अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैंने| साहिर लुधियानवी

  • 31st Mar 2023

    ये भी पी लिया मैंने!

    मोहब्बत तर्क की मैंने गरेबाँ सी लिया मैंने, ज़माने अब तो ख़ुश हो ज़हर ये भी पी लिया मैंने| साहिर लुधियानवी

  • 31st Mar 2023

    कविता!

    आज एक बार फिर से मैं अपनी किस्म के अनूठे कवि स्वर्गीय सुदामा प्रसाद पांडे ‘धूमिल’ जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| धूमिल जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धूमिल जी की यह कविता, जो कविता के बारे में ही है – उसे मालूम है…

  • 30th Mar 2023

    दरवाज़ा था पहले!

    ये दीवारें तो हैं इस दौर का सच, खुला हर दिल का दरवाज़ा था पहले|    राजेश रेड्डी

  • 30th Mar 2023

    चल जाता था पहले!

    बहुत कुछ भी नहीं काफ़ी यहाँ अब, बहुत थोड़े से चल जाता था पहले| राजेश रेड्डी

  • 30th Mar 2023

    बहलाता था पहले!

    किया ईजाद जिसने भी ख़ुदा को, वो ख़ुद को कैसे बहलाता था पहले| राजेश रेड्डी

  • 30th Mar 2023

    समझाता था पहले!

    समझ में कुछ नहीं आता अब उसकी, वो जो औरों को समझाता था पहले| राजेश रेड्डी

  • 30th Mar 2023

    आईना था पहले!

    बड़ी तस्वीर लटका दी है अपनी, जहाँ छोटा सा आईना था पहले| राजेश रेड्डी

  • 30th Mar 2023

    कौन आता इस जहाँ में!

    जो होता कौन आता इस जहाँ में, किसे दुनिया का अंदाज़ा था पहले| राजेश रेड्डी

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