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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Apr 2023

    वाणी-विहार

    आज एक बार फिर से मैं हिन्दी साहित्य की सभी विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान करने वाले प्रतिष्ठित कवि श्री रामदरश मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| आज की इस रचना में मिश्र जी ने कविता के व्यवसायीकरण की ओर संकेत किया है| मिश्र जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की…

  • 4th Apr 2023

    लौट चलें अब अपने घर

    शब भर तो आवारा फिरे, लौट चलें अब अपने घर|     जाँ निसार अख़्तर

  • 4th Apr 2023

    ख़्वाब-ए-सहर!

    रात के पीछे रात चले, ख़्वाब हुआ हर ख़्वाब-ए-सहर| जाँ निसार अख़्तर

  • 4th Apr 2023

    हाथ में सजते हैं पत्थर!

    पेट पे पत्थर बाँध न ले, हाथ में सजते हैं पत्थर| जाँ निसार अख़्तर

  • 4th Apr 2023

    छोटे ज़ेहन के लोग!

    छोटे छोटे ज़ेहन के लोग, हमसे उनकी बात न कर| जाँ निसार अख़्तर

  • 4th Apr 2023

    लाख तरह से नाम तिरा

    लाख तरह से नाम तिरा, बैठा लिक्खूँ काग़ज़ पर| जाँ निसार अख़्तर

  • 4th Apr 2023

    फैलेगी ये आग किधर!

    फूँकने वाले सोचा भी, फैलेगी ये आग किधर| जाँ निसार अख़्तर

  • 4th Apr 2023

    बिचारे जाएँ किधर!

    गाँव में आकर शहर बसे, गाँव बिचारे जाएँ किधर| जाँ निसार अख़्तर

  • 4th Apr 2023

    उषस्(एक)

    आज मैं हिन्दी के अति प्रतिष्ठित कवि तथा ज्ञानपीठ सम्मान सहित अनेक साहित्यिक उपाधियों से अलंकृत स्वर्गीय नरेश मेहता जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| इस रचना में सुबह के कुछ बहुत सुंदर चित्र शामिल हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नरेश मेहता जी की यह कविता – नीलम वंशी में से कुंकम…

  • 3rd Apr 2023

    जीने से जीने का हुनर!

    कितना मुश्किल कितना कठिन, जीने से जीने का हुनर| जाँ निसार अख़्तर

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