गाँव में आकर शहर बसे,
गाँव बिचारे जाएँ किधर|
जाँ निसार अख़्तर
A sky full of cotton beads like clouds
गाँव में आकर शहर बसे,
गाँव बिचारे जाएँ किधर|
जाँ निसार अख़्तर
सिकुड़ते खेत
चहुओर बनती चौड़ी चौड़ी सड़के,
दूधिया रौशनी मेरे आंगन में भी हो गया,
देखते ही देखते मेरा गांव कही खो गया।
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