बिचारे जाएँ किधर!

गाँव में आकर शहर बसे,

गाँव बिचारे जाएँ किधर|

जाँ निसार अख़्तर

One response to “बिचारे जाएँ किधर!”

  1. सिकुड़ते खेत
    चहुओर बनती चौड़ी चौड़ी सड़के,
    दूधिया रौशनी मेरे आंगन में भी हो गया,
    देखते ही देखते मेरा गांव कही खो गया।

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