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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Apr 2023

    मय-कदे के रास्ते में!

    वो देखो मय-कदे के रास्ते में, कोई अल्लाह-वाला जा रहा है| राहत इंदौरी

  • 7th Apr 2023

    रो’ब डाला जा रहा है!

    चराग़ों को उछाला जा रहा है, हवा पर रो’ब डाला जा रहा है| राहत इंदौरी

  • 7th Apr 2023

    हिसाब कर दूँगा!

    महाजनों से कहो थोड़ा इंतिज़ार करें, शराब-ख़ाने से आकर हिसाब कर दूँगा| राहत इंदौरी

  • 7th Apr 2023

    पानी शराब कर दूँगा!

    मुझे गिलास के अंदर ही क़ैद रख वर्ना, मैं सारे शहर का पानी शराब कर दूँगा| राहत इंदौरी

  • 7th Apr 2023

    रौशनी हूँ मैं!

    मुझे यक़ीन कि महफ़िल की रौशनी हूँ मैं, उसे ये ख़ौफ़ कि महफ़िल ख़राब कर दूँगा| राहत इंदौरी

  • 7th Apr 2023

    बे-नक़ाब कर दूँगा!

    हज़ार पर्दों में ख़ुद को छुपा के बैठ मगर, तुझे कभी न कभी बे-नक़ाब कर दूँगा| राहत इंदौरी

  • 7th Apr 2023

    ला-जवाब कर दूँगा!

    मैं इंतिज़ार में हूँ तू कोई सवाल तो कर, यक़ीन रख मैं तुझे ला-जवाब कर दूँगा| राहत इंदौरी

  • 7th Apr 2023

    गुलाब कर दूँगा!

    सिसकती रुत को महकता गुलाब कर दूँगा, मैं इस बहार में सबका हिसाब कर दूँगा| राहत इंदौरी

  • 7th Apr 2023

    चारणों के दिन!

    आज मैं हिन्दी नवगीत के प्रमुख हस्ताक्षर स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| उमाकांत मालवीय जी ने इस रचना में कवियों को उनके कवि धर्म का स्मरण कराया है| मालवीय जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी का यह…

  • 6th Apr 2023

    क्यूँ न दिखाई देंगे!

    पिछली सफ़ में ही सही है तो इसी महफ़िल में, आप देखेंगे तो हम क्यूँ न दिखाई देंगे|     वसीम बरेलवी

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