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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 24th Apr 2023

    इस रेंगती हयात का

    इस रेंगती हयात का कब तक उठाएँ बार, बीमार अब उलझने लगे हैं तबीब से| साहिर लुधियानवी

  • 24th Apr 2023

    देखा है ज़िंदगी को!

    देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से, चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से| साहिर लुधियानवी

  • 24th Apr 2023

    तांडव!

    हमारे राष्ट्रकवि के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले और हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि, जो सांसद रहे थे और कवि सम्मेलनों की शान हुआ करते थे, ऐसे स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ|  दिनकर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत…

  • 23rd Apr 2023

    ये ज़ेवर हैं पीतल!

    ये गुल काग़ज़ हैं ये ज़ेवर हैं पीतल, समझ में जब ये आ जाए तो कहना| जावेद अख़्तर

  • 23rd Apr 2023

    रास आए तो कहना!

    ये दुनिया तुमको रास आए तो कहना. न सर पत्थर से टकराए तो कहना| जावेद अख़्तर

  • 23rd Apr 2023

    जाग उट्ठी ज़िंदगानी!

    अँधेरे ढल गए रौशन हुए मंज़र ज़मीं जागी फ़लक जागा, तो जैसे जाग उट्ठी ज़िंदगानी, मगर कुछ याद-ए-माज़ी ओढ़ के सोए हुए लोगों को लगता है जगाने में अभी कुछ दिन लगेंगे| जावेद अख़्तर

  • 23rd Apr 2023

    नए रस्ते बनाने में!

    पुरानी मंज़िलों का शौक़ तो किसको है बाक़ी, अब नई हैं मंज़िलें हैं सबके दिल में जिनके अरमाँ, बना लेना नई मंज़िल न था मुश्किल मगर ऐ दिल, नए रस्ते बनाने में अभी कुछ दिन लगेंगे| जावेद अख़्तर

  • 23rd Apr 2023

    नए अरमाँ सजाने में!

    कोई टूटे हुए शीशे लिए अफ़्सुर्दा-ओ-मग़्मूम, कब तक यूँ गुज़ारे बे-तलब बे-आरज़ू दिन, तो इन ख़्वाबों की किर्चें हम ने पलकों से झटक दीं पर, नए अरमाँ सजाने में अभी कुछ दिन लगेंगे| जावेद अख़्तर

  • 23rd Apr 2023

    अभी कुछ दिन लगेंगे!

    कभी हमको यक़ीं था ज़ो’म था दुनिया हमारी जो मुख़ालिफ़ है तो हो जाए, मगर तुम मेहरबाँ हो, हमें ये बात वैसे याद तो अब क्या है लेकिन, हाँ इसे यकसर भुलाने में अभी कुछ दिन लगेंगे| जावेद अख़्तर

  • 23rd Apr 2023

    अभी कुछ दिन लगेंगे!

    ज़रा मौसम तो बदला है मगर पेड़ों की शाख़ों पर, नए पत्तों के आने में अभी कुछ दिन लगेंगे, बहुत से ज़र्द चेहरों पर ग़ुबार-ए-ग़म है कम बे-शक, पर उनको मुस्कुराने में अभी कुछ दिन लगेंगे| जावेद अख़्तर

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