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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 4th Nov 2023

    डॉलर में यूँ नचाएगी!

    तहज़ीब के लिबास उतर जाएँगे जनाब, डॉलर में यूँ नचाएगी इक्कीसवीं सदी| बशीर बद्र

  • 4th Nov 2023

    उन झुग्गियों में आएगी!

    जल कर जो राख हो गईं दंगों में इस बरस, उन झुग्गियों में आएगी इक्कीसवीं सदी| बशीर बद्र

  • 4th Nov 2023

    बारूद भी बिछाएगी!

    बग़दाद दिल्ली मास्को लंदन के दरमियाँ, बारूद भी बिछाएगी इक्कीसवीं सदी| बशीर बद्र

  • 4th Nov 2023

    इक्कीसवीं सदी!

    आहन* में ढलती जाएगी इक्कीसवीं सदी, फिर भी ग़ज़ल सुनाएगी इक्कीसवीं सदी| *फौलाद बशीर बद्र

  • 4th Nov 2023

    बढ़ता हुआ बच्चा!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि और कुशल मंच संचालक श्री अशोक चक्रधर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| चक्रधर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज की कविता का विषय भी अलग किस्म का है| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी की…

  • 3rd Nov 2023

    किसी का प्यार भी रख!

    पहाड़ गूँजें नदी गाए ये ज़रूरी है, सफ़र कहीं का हो दिल में किसी का प्यार भी रख|    निदा फ़ाज़ली

  • 3rd Nov 2023

    ज़ेहन में बहार भी रख!

    ये ही लहू है शहादत ये ही लहू पानी, ख़िज़ाँ नसीब सही ज़ेहन में बहार भी रख| निदा फ़ाज़ली

  • 3rd Nov 2023

    इंतिज़ार भी रख!

    यक़ीन चाँद पे सूरज में ए‘तिबार भी रख, मगर निगाह में थोड़ा सा इंतिज़ार भी रख| निदा फ़ाज़ली

  • 3rd Nov 2023

    क्या था वो एक शख़्स!

    अब क्या बताएँ कौन था क्या था वो एक शख़्स, गिनती के चार हर्फ़ों का जो नाम रह गया| निदा फ़ाज़ली

  • 3rd Nov 2023

    बहुत सोचता था वो!

    उसका क़ुसूर ये था बहुत सोचता था वो, वो कामयाब हो के भी नाकाम रह गया| निदा फ़ाज़ली

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