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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 8th Nov 2023

    उस गुल-बदन पे!

    फूलों की सेज पर ज़रा आराम क्या किया, उस गुल-बदन पे नक़्श उठ आए गुलाब के| आदिल मंसूरी

  • 8th Nov 2023

    उसी ख़ाना-ख़राब के!

    वो जो तुम्हारे हाथ से आकर निकल गया, हम भी क़तील* हैं उसी ख़ाना-ख़राब के| *Victim of Love, Killed by आदिल मंसूरी

  • 8th Nov 2023

    आशिक़ थे शहर में जो!

    आशिक़ थे शहर में जो पुराने शराब के, हैं उनके दिल में वसवसे अब एहतिसाब* के| *नशाबंदी आदिल मंसूरी

  • 8th Nov 2023

    एक अंतर्कथा, भाग-1

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के विख्यात प्रगतिशील कवि स्वर्गीय गजानन माधव मुक्तिबोध जी की एक लंबी कविता का प्रारंभिक भाग शेयर कर रहा हूँ| मुक्तिबोध जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गजानन माधव मुक्तिबोध जी की यह कविता – अग्नि के काष्ठखोजती माँ,बीनती नित्य…

  • 7th Nov 2023

    शाख़ फल तो सकती है

    हुई है गर्म लहु पी के इश्क़ की तलवार, यूँ ही जिलाए जा ये शाख़ फल तो सकती है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 7th Nov 2023

    पिघल तो सकती है!

    सुना है बर्फ़ के टुकड़े हैं दिल हसीनों के, कुछ आँच पा के ये चाँदी पिघल तो सकती है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 7th Nov 2023

    कि गिरते गिरते भी!

    तिरी निगाह सहारा न दे तो बात है और, कि गिरते गिरते भी दुनिया सँभल तो सकती है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 7th Nov 2023

    गल तो सकती है!

    ग़म-ए-ज़माना-ओ-सोज़-ए-निहाँ की आँच तो दे, अगर न टूटे ये ज़ंजीर गल तो सकती है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 7th Nov 2023

    अज़ल से सोई है!

    अज़ल से सोई है तक़दीर-ए-इश्क़ मौत की नींद, अगर जगाइए करवट बदल तो सकती है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 7th Nov 2023

    बात बिरानी हो जाती है!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के वरिष्ठ नवगीतकार श्री बालस्वरूप राही जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| राही जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह गीत – मेरे मन की साध आंख में झांक आंक लोकह देने पर बात…

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