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नाम अधरों पर आया!
लीजिए आज एक बार फिर मैं अपने समय के प्रमुख हिन्दी कवि और बाल पत्रिका पराग के संपादक रहे स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| नंदन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की यह कविता – एक नाम…
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अख़बार किया जाना है
कौन पढ़ता है यहाँ खोल के अब दिल की किताब, अब तो चेहरे को ही अख़बार किया जाना है| राजेश रेड्डी
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बातों में कब तक!
ख़्वाबों और ख़्वाहिशों की बातों में आकर कब तक, ख़ुद को रुस्वा सर-ए-बाज़ार किया जाना है| राजेश रेड्डी
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इज़हार किया जाना है
मसअला ये नहीं कि इश्क़ हुआ है हमको, मसअला ये है कि इज़हार किया जाना है| राजेश रेड्डी
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आईने में अपनी सूरत
देखनी है कभी आईने में अपनी सूरत, इक मुख़ालिफ़ को तरफ़-दार किया जाना है| राजेश रेड्डी
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बुत बस इक अपना ही
तोड़ के रख दिए बाक़ी तो अना ने सारे, बुत बस इक अपना ही मिस्मार किया जाना है| राजेश रेड्डी
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तय्यार किया जाना है!
दिल तो दुनिया से निकलने पे है आमादा मगर, इक ज़रा ज़ेहन को तय्यार किया जाना है| राजेश रेड्डी