Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 20th Jun 2023

    बे-नक़ाब कर दूँगा!

    हज़ार पर्दों में ख़ुद को छुपा के बैठ मगर, तुझे कभी न कभी बे-नक़ाब कर दूँगा| राहत इंदौरी

  • 20th Jun 2023

    ला-जवाब कर दूँगा!

    मैं इंतिज़ार में हूँ तू कोई सवाल तो कर, यक़ीन रख मैं तुझे ला-जवाब कर दूँगा| राहत इंदौरी

  • 20th Jun 2023

    गुलाब कर दूँगा!

    सिसकती रुत को महकता गुलाब कर दूँगा, मैं इस बहार में सब का हिसाब कर दूँगा| राहत इंदौरी

  • 20th Jun 2023

    तो हिसाब करूँ!

    ये ज़िंदगी जो मुझे क़र्ज़-दार करती रही, कहीं अकेले में मिल जाए तो हिसाब करूँ| राहत इंदौरी

  • 20th Jun 2023

    मैं करवटों के नए!

    मैं करवटों के नए ज़ाइक़े लिखूँ शब-भर, ये ‘इश्क़ है तो कहाँ ज़िंदगी ‘अज़ाब करूँ| राहत इंदौरी

  • 20th Jun 2023

    कब से तुम गा रहे!

    आज मैं हिन्दी नवगीत के प्रसिद्ध कवि स्वर्गीय ठाकुरप्रसाद सिंह जी का एक नवगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| उनकी कुछ रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय ठाकुरप्रसाद सिंह जी की यह रचना  –   कब से तुम गा रहे, कब से तुम गा रहेकब से तुम गा रहे ! जाल…

  • 19th Jun 2023

    भीड़ गूँगे बहरों की!

    है मेरे चारों तरफ़ भीड़ गूँगे बहरों की, किसे ख़तीब बनाऊँ किसे ख़िताब करूँ| राहत इंदौरी

  • 19th Jun 2023

    इसे ख़राब करूँ!

    उस आदमी को बस इक धुन सवार रहती है, बहुत हसीन है दुनिया इसे ख़राब करूँ| राहत इंदौरी

  • 19th Jun 2023

    मुझे बुतों से इजाज़त

    मुझे बुतों से इजाज़त अगर कभी मिल जाए, तो शहर-भर के ख़ुदाओं को बे-नक़ाब करूँ| राहत इंदौरी

  • 19th Jun 2023

    रूह के छालों का कुछ!

    अब अपनी रूह के छालों का कुछ हिसाब करूँ, मैं चाहता था चराग़ों को आफ़्ताब करूँ| राहत इंदौरी

←Previous Page
1 … 787 788 789 790 791 … 1,394
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar