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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 4th Jul 2023

    न जिसका नाम है कोई

    न जिसका नाम है कोई न जिस की शक्ल है कोई, इक ऐसी शय का क्यूँ हमें अज़ल से इंतिज़ार है| शहरयार

  • 4th Jul 2023

    हर एक दिल फ़िगार है!

    हर एक जिस्म रूह के अज़ाब से निढाल है, हर एक आँख शबनमी हर एक दिल फ़िगार है| शहरयार

  • 4th Jul 2023

    ग़ुबार ही ग़ुबार है!

    ये क्या जगह है दोस्तो ये कौन सा दयार है, हद-ए-निगाह तक जहाँ ग़ुबार ही ग़ुबार है| शहरयार

  • 4th Jul 2023

    बिखर गया यारो!

    मैं जिसको लिखने के अरमान में जिया अब तक, वरक़ वरक़ वो फ़साना बिखर गया यारो| शहरयार

  • 4th Jul 2023

    क्या हुआ था उसे!

    वो कौन था वो कहाँ का था क्या हुआ था उसे, सुना है आज कोई शख़्स मर गया यारो| शहरयार

  • 4th Jul 2023

    दरिया उतर गया यारो!

    भटक रही थी जो कश्ती वो ग़र्क़-ए-आब हुई, चढ़ा हुआ था जो दरिया उतर गया यारो| शहरयार

  • 4th Jul 2023

    हर नक़्श तमन्ना का!

    हर एक नक़्श तमन्ना का हो गया धुँधला, हर एक ज़ख़्म मिरे दिल का भर गया यारो| शहरयार

  • 4th Jul 2023

    मैं अपने साए से!

    अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो, मैं अपने साए से कल रात डर गया यारो| शहरयार

  • 4th Jul 2023

    निर्विकल्प!

    आज शायद पहली बार मैं अज्ञेय जी द्वारा संपादित ‘तारसप्तक’ के एक प्रमुख हिन्दी कवि स्वर्गीय भारत भूषण अग्रवाल जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ|  उनको अपनी रचनाओं के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक सम्मान और पुरस्कार प्राप्त हुए थे| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भारत भूषण अग्रवाल जी की यह कविता…

  • 3rd Jul 2023

    हुस्न की दहशत अजब

    हुस्न की दहशत अजब थी वस्ल की शब में ‘मुनीर’, हाथ जैसे इंतिहा-ए-शौक़ से शल हो गया|    मुनीर नियाज़ी

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