Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 20th Jul 2023

    उड़ाता है कबूतर पहले

    क्या अजब है कि उड़ाता है कबूतर पहले, फिर फ़ज़ाओं में वो बारूद की बू घोलता है| राजेश रेड्डी

  • 20th Jul 2023

    मुझ में इक बच्चा!

    कितनी आसानी से दुनिया की गिरह खोलता है, मुझ में इक बच्चा बुज़ुर्गों की तरह बोलता है| राजेश रेड्डी

  • 20th Jul 2023

    मुक्त कर दो मुझे – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…

  • 18th Jul 2023

    यात्रा प्रारंभ!

    मैं पणजी, गोवा में रहता हूँ और यहाँ से सामान्यतः अपनी ब्लॉग पोस्ट लिखता हूँ| कल मैं लंदन के लिए रवाना हो रहा हूँ और एक माह से अधिक समय तक वहाँ रहूँगा| मैं पहले भी दो बार लंदन में अपने बेटे के घर रहा हूँ और वहाँ से कुछ ट्रैवल ब्लॉग्स लिखे हैं, मुझे…

  • 18th Jul 2023

    सजाए फिरते थे!

    सजाए फिरते थे झूटी अना जो चेहरों पर, वो लोग क़स्र-ए-सिकंदर में जा के लेट गए| मुनव्वर राना

  • 18th Jul 2023

    दर में जा के लेट गए!

    तमाम उम्र जो निकले न थे हवेली से, वो एक गुम्बद-ए-बे-दर में जा के लेट गए| मुनव्वर राना

  • 18th Jul 2023

    मौत से डराते हैं!

    ये बेवक़ूफ़ उन्हें मौत से डराते हैं, जो ख़ुद ही साया-ए-ख़ंजर में जा के लेट गए| मुनव्वर राना

  • 18th Jul 2023

    न जाने कैसी थकन थी

    न जाने कैसी थकन थी कभी नहीं उतरी, चले जो घर से तो दफ़्तर में जा के लेट गए| मुनव्वर राना

  • 18th Jul 2023

    हमारी तिश्ना-नसीबी!

    हमारी तिश्ना-नसीबी का हाल मत पूछो, वो प्यास थी कि समुंदर में जा के लेट गए| मुनव्वर राना

  • 18th Jul 2023

    तमाम उम्र हम!

    तमाम उम्र हम इक दूसरे से लड़ते रहे, मगर मरे तो बराबर में जा के लेट गए| मुनव्वर राना

←Previous Page
1 … 763 764 765 766 767 … 1,395
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar