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ओ प्यासे अधरोंवाली!
आज एक बार फिर से मैं हिन्दी काव्य मंचों पर गीतों के राजकुंवर के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले और हिन्दी फिल्मों को भी कुछ अमर गीत देने वाले स्वर्गीय गोपालदास नीरज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नीरज जी की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज…
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समझा न इशारा!
जज़्बात भी हिन्दू होते हैं चाहत भी मुसलमाँ होती है, दुनिया का इशारा था लेकिन समझा न इशारा, दिल ही तो है| साहिर लुधियानवी
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धड़कन रुक जाए!
इस तरह निगाहें मत फेरो, ऐसा न हो धड़कन रुक जाए, सीने में कोई पत्थर तो नहीं एहसास का मारा, दिल ही तो है| साहिर लुधियानवी
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बेचारा दिल ही तो है!
भूले से मोहब्बत कर बैठा, नादाँ था बेचारा, दिल ही तो है, हर दिल से ख़ता हो जाती है, बिगड़ो न ख़ुदारा, दिल ही तो है| साहिर लुधियानवी
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कुछ अच्छा नहीं गया!
अब क्या कहें नुजूमी के बारे में छोड़िए, अपना तो ये बरस भी कुछ अच्छा नहीं गया| *ज्योतिषी राजेश रेड्डी
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बाँटा नहीं गया!
नक़्शे में आज ढूँडने बैठा हूँ वो ज़मीं, जिसको हज़ार टुकड़ों में बाँटा नहीं गया| राजेश रेड्डी
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जो देखा नहीं गया!
आँखों पे ऐसा वक़्त भी गुज़रा है बार-हा, वो देखना पड़ा है जो देखा नहीं गया| राजेश रेड्डी
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ठहरा नहीं गया!
दुनिया से, जिससे आगे का सोचा नहीं गया, हमसे वहाँ पहुँच के भी ठहरा नहीं गया| राजेश रेड्डी
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जान से तो जा चुके!
आपकी बातों में आकर जान से तो जा चुके, अब तो इनमें ज़हर की मिक़दार कम कर दीजिए| राजेश रेड्डी
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अंधकार बढ़ता !
आज एक बार फिर से मैं हिन्दी गीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| बच्चन जी की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी की यह कविता – अंधकार बढ़ता जाता है! मिटता अब तरु-तरु में अंतर,तम…