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रौशन अपनी रात करें!
शाम हुई फिर जोश-ए-क़दह* ने बज़्म-ए-हरीफ़ाँ**रौशन की, घर को आग लगाएँ हम भी रौशन अपनी रात करें| *शराब पीने का जोश, **जीवन की महफ़िल फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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दर्द थमे तो बात करें!
अब जो कोई पूछे भी तो उससे क्या शरह-ए-हालात करें, दिल ठहरे तो दर्द सुनाएँ दर्द थमे तो बात करें| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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आ रहे तुम बनकर!
आज मैं हिन्दी काव्य मंचों पर अपने गीतों से धूम मचाने वाले स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नेपाली जी की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी का यह गीत – आ रहे तुम बन कर मधुमासऔर…
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सर सलामत है तो!
सर सलामत है तो क्या संग-ए-मलामत की कमी, जान बाक़ी है तो पैकान-ए-क़ज़ा और भी हैं| साहिर लुधियानवी
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यारों की ज़बानें चुप हैं!
क्या हुआ गर मिरे यारों की ज़बानें चुप हैं, मेरे शाहिद* मिरे यारों के सिवा और भी हैं | *Lovers साहिर लुधियानवी
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एक हम ही नहीं!
अहल-ए-दिल और भी हैं अहल-ए-वफ़ा और भी हैं, एक हम ही नहीं दुनिया से ख़फ़ा और भी हैं| साहिर लुधियानवी