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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 6th Sep 2023

    धरा सा रहता है!

    सर में जुम्बिश ख़याल की भी नहीं, ज़ानुओं पर धरा सा रहता है| गुलज़ार

  • 6th Sep 2023

    ज़रा सा रहता है!

    एक पल देख लूँ तो उठता हूँ, जल गया घर ज़रा सा रहता है| गुलज़ार 

  • 6th Sep 2023

    मंज़र हरा सा रहता है

    काई सी जम गई है आँखों पर, सारा मंज़र हरा सा रहता है| गुलज़ार 

  • 6th Sep 2023

    डरा सा रहता है!

    सहमा सहमा डरा सा रहता है, जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है| गुलज़ार 

  • 6th Sep 2023

    चाँद ने बात कराई भी!

    कल साहिल पर लेटे लेटे कितनी सारी बातें कीं, आप का हुंकारा न आया चाँद ने बात कराई भी| गुलज़ार 

  • 6th Sep 2023

    अपनी बात सुनाई भी!

    ख़ामोशी का हासिल भी इक लम्बी सी ख़ामोशी थी, उन की बात सुनी भी हम ने अपनी बात सुनाई भी| गुलज़ार 

  • 6th Sep 2023

    शब पहनाई भी!

    कितनी जल्दी मैली करता है पोशाकें रोज़ फ़लक, सुब्ह ही रात उतारी थी और शाम को शब पहनाई भी| गुलज़ार 

  • 6th Sep 2023

    पवन सामने है !

    आज मैं हिन्दी के एक प्रमुख गीतकार और विशिष्ट कवि स्वर्गीय वीरेंद्र मिश्र  जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| मिश्र जी की अधिक रचनाएं मैंने शायद पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय वीरेंद्र मिश्र  जी का यह गीत – पवन सामने है नहीं गुनगुनानासुमन ने कहा पर भ्रमर ने…

  • 5th Sep 2023

    आपका इक सौदाई भी

    दो दो शक्लें दिखती हैं इस बहके से आईने में, मेरे साथ चला आया है आपका इक सौदाई भी| गुलज़ार

  • 5th Sep 2023

    माज़ी की रुस्वाई भी!

    यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं, सोंधी सोंधी लगती है तब माज़ी की रुस्वाई भी| गुलज़ार

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