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चाँद ने बात कराई भी!
कल साहिल पर लेटे लेटे कितनी सारी बातें कीं, आप का हुंकारा न आया चाँद ने बात कराई भी| गुलज़ार
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शब पहनाई भी!
कितनी जल्दी मैली करता है पोशाकें रोज़ फ़लक, सुब्ह ही रात उतारी थी और शाम को शब पहनाई भी| गुलज़ार
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पवन सामने है !
आज मैं हिन्दी के एक प्रमुख गीतकार और विशिष्ट कवि स्वर्गीय वीरेंद्र मिश्र जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| मिश्र जी की अधिक रचनाएं मैंने शायद पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय वीरेंद्र मिश्र जी का यह गीत – पवन सामने है नहीं गुनगुनानासुमन ने कहा पर भ्रमर ने…
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आपका इक सौदाई भी
दो दो शक्लें दिखती हैं इस बहके से आईने में, मेरे साथ चला आया है आपका इक सौदाई भी| गुलज़ार
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माज़ी की रुस्वाई भी!
यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं, सोंधी सोंधी लगती है तब माज़ी की रुस्वाई भी| गुलज़ार