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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th Sep 2023

    लकीरों से नहीं उलझा!

    कभी मैं अपने हाथों की लकीरों से नहीं उलझा, मुझे मालूम है क़िस्मत का लिक्खा भी बदलता है| बशीर बद्र

  • 14th Sep 2023

    तहरीरों को पढ़ लेना!

    अगर फ़ुर्सत मिले पानी की तहरीरों को पढ़ लेना, हर इक दरिया हज़ारों साल का अफ़्साना लिखता है| बशीर बद्र

  • 14th Sep 2023

    हवा से पूछना!

    तुम्हारे शहर के सारे दिए तो सो गए कब के, हवा से पूछना दहलीज़ पे ये कौन जलता है| बशीर बद्र

  • 14th Sep 2023

    यक़ीं आ जाएगा पलकों

    मैं जब सो जाऊँ इन आँखों पे अपने होंट रख देना, यक़ीं आ जाएगा पलकों तले भी दिल धड़कता है| बशीर बद्र

  • 14th Sep 2023

    बहुत ख़ामोश बैठा है!

    उदासी आसमाँ है दिल मिरा कितना अकेला है, परिंदा शाम के पुल पर बहुत ख़ामोश बैठा है| बशीर बद्र

  • 14th Sep 2023

    गुज़रना है गुज़र जाएगी

    वक़्त नदियों को उछाले कि उड़ाए पर्बत, उम्र का काम गुज़रना है गुज़र जाएगी| निदा फ़ाज़ली  

  • 14th Sep 2023

    कुंठा!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के एक प्रतिष्ठित कवि स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| दुष्यंत जी को उनके द्वारा आपातकाल में लिखी गई ग़ज़लों के संग्रह ‘साये में धूप’ के लिए विशेष ख्याति मिली थी| दुष्यंत जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए…

  • 13th Sep 2023

    तिरी राय बदल जाएगी

    मेरी ग़ुर्बत को शराफ़त का अभी नाम न दे, वक़्त बदला तो तिरी राय बदल जाएगी| निदा फ़ाज़ली

  • 13th Sep 2023

    अभी नींद कहाँ आएगी

    और कुछ देर यूँही जंग सियासत मज़हब, और थक जाओ अभी नींद कहाँ आएगी| निदा फ़ाज़ली

  • 13th Sep 2023

    मोड़ पे डस जाएगी!

    जगमगाती हुई सड़कों पे अकेले न फिरो, शाम आएगी किसी मोड़ पे डस जाएगी| निदा फ़ाज़ली

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