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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 12th Mar 2026

    आ लौट के आ जा मेरे मीत!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म- रानी रूपमती के लिए मुकेश जी का गाया गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे भरत व्यास जी ने लिखा था और इसका संगीतकार थे श्री एस. एन. त्रिपाठी- आ लौट के आ जा मेरे मीत, तुझे मेरे गीत बुलाते हैं! आशा है आपको…

  • 12th Mar 2026

    यही आदत तिरी!

    मुझे मायूस भी करती नहीं है,यही आदत तिरी अच्छी नहीं है। जावेद अख़्तर

  • 12th Mar 2026

    कुछ का व्यवहार बदल गया!

    आज मैं फिर से श्रेष्ठ हिंदी कवि एक स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा जी की यह कविता– कुछ का व्यवहार बदल गया। कुछ का नहींबदला।जिनसे उम्मीद थी, नहीं बदलेगाउनका बदल गया।जिनसे आशंका थी,नहीं बदला।जिन्हें…

  • 11th Mar 2026

    बात पहले सी नहीं है!

    हमारे दिल में अब तल्ख़ी नहीं है,मगर वो बात पहले सी नहीं है। जावेद अख़्तर

  • 11th Mar 2026

    ग़म नहीं मुझ पे जो!

    मेरे नग़्मों से उन का दिल न दुखे,ग़म नहीं मुझ पे जो गुज़र जाए| जाँ निसार अख़्तर

  • 11th Mar 2026

    रंग बरसे भीगे चुनर वाली!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं फिल्म- सिलसिला के होली गीत का एक अंश अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे अमिताभ बच्चन जी ने गाया थ और उन पर ही फिल्माया गया था- रंग बरसे भीगे चुनर वाली, रंग बरसे! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 11th Mar 2026

    मेरी याद में तुम न आंसू बहाना!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं फिल्म- मदहोश के लिए तलत महमूद जी का गाया एक गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसे राजा मेहदी अली खां जी ने लिखा था और इसका संगीत मदन मोहन जी ने तैयार किया था- मेरी याद में तुम न आंसू बहाना, न जी को…

  • 11th Mar 2026

    क्यूँ ये इल्ज़ाम उनके!

    हम हैं अपनी ही जान के दुश्मन,क्यूँ ये इल्ज़ाम उन के सर जाए| जाँ निसार अख़्तर

  • 11th Mar 2026

    इधर दो फूल मुँह से मुँह सटाए!

    आज मैं फिर से हिंदी नवगीत के श्रेष्ठतम कवियों में से एक स्वर्गीय रमेश रंजक जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।रंजक जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह नवगीत– इधर दो फूल मुँह से मुँह सटाएबात करते हैंयहीं से काट…

  • 10th Mar 2026

    धड़कन ज़रा ठहर जाए!

    उन को जी भर के देख लेने दे,दिल की धड़कन ज़रा ठहर जाए| जाँ निसार अख़्तर

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