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आशिक़ी सब्र-तलब!
आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब,दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होने तक। मिर्ज़ा ग़ालिब
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आह को चाहिए इक!
आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक,कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक। मिर्ज़ा ग़ालिब
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अशोक वाटिका प्रसंग
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में मुकेश जी द्वारा किए गए श्रीरामचरित मानस के पाठ में से सुंदर कांड में से अशोक वाटिका से संबंधित हनुमान जी की लीला का कुछ अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ। आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद्।
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जिसने नज़र उठाई!
जिसने नज़र उठाई वही शख़्स गुम हुआ,इस जिस्म के तिलिस्म की बंदिश तो देखिए| दुष्यंत कुमार
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घोड़े का दाना!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की यह कविता – सेठ करोड़ीमल के घोड़े का नौकर हैभूरा आरख। –बचई उसका जानी दुश्मन ! हाथ जोड़कर,पाँव पकड़कर,आँखों में…
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उन की अपील है!
उन की अपील है कि उन्हें हम मदद करें,चाक़ू की पसलियों से गुज़ारिश तो देखिए| दुष्यंत कुमार
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गूँगे निकल पड़े हैं!
गूँगे निकल पड़े हैं ज़बाँ की तलाश में,सरकार के ख़िलाफ़ ये साज़िश तो देखिए| दुष्यंत कुमार
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होने लगी है जिस्म में!
होने लगी है जिस्म में जुम्बिश तो देखिए,इस पर कटे परिंदे की कोशिश तो देखिए| दुष्यंत कुमार