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नज़र वो साफ़ अब !
तिरी तस्वीर जो टूटे हुए दिल का सहारा थी,नज़र वो साफ़ अब आती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ| अनवर मिर्ज़ापुरी
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जिसे अपना समझता!
जिसे अपना समझता था वो आँख अब अपनी दुश्मन है,कि ये रोने से बाज़ आती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ| अनवर मिर्ज़ापुरी
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सितारो तुम को नींद !
तुम्हीं तो हो शब-ए-ग़म में जो मेरा साथ देते हो,सितारो तुम को नींद आती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ| अनवर मिर्ज़ापुरी
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हम जानें या राम!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में अपने एक अग्रज स्वर्गीय प्रेम शर्मा जी का मार्मिक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- कैसे बीते दिवस हमारे, हम जानें या राम। आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद।
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जो ख़्वाबों में मिरे!
जो ख़्वाबों में मिरे आ कर तसल्ली मुझ को देती थी,वो सूरत अब नज़र आती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ| अनवर मिर्ज़ापुरी
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अकेला पा के मुझको!
अकेला पा के मुझ को याद उन की आ तो जाती है,मगर फिर लौट कर जाती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ| अनवर मिर्ज़ापुरी
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आज सुबह का गीत!
प्रस्तुत है आज का यह गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- वर्तमान बन रहा अतीत,ये है आज सुबह का गीत। पूंजी हमें मिली सपनों कीहर रस्ते पर साथ चले हैंहम जब गिरकर उठे राह मेंसदा हाथ में हाथ गहे हैं, झंडे और कनात नहीं हैंअपनी पूंजी, अपने गीत। एकाकी जीवन में हमनेडोर नहीं छोड़ी सपनों…
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मैं कैसे सो जाऊँ!
किसी सूरत भी नींद आती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ,कोई शय दिल को बहलाती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ| अनवर मिर्ज़ापुरी
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मिरे साथ जल न जाए!
मुझे फूँकने से पहले मिरा दिल निकाल लेना,ये किसी की है अमानत मिरे साथ जल न जाए| अनवर मिर्ज़ापुरी
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दम निकल न जाए!
मिरी ज़िंदगी के मालिक मिरे दिल पे हाथ रखना,तिरे आने की ख़ुशी में मिरा दम निकल न जाए| अनवर मिर्ज़ापुरी