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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Nov 2025

    चाँद से फूल से या!

    चाँद से फूल से या मेरी ज़बाँ से सुनिए,हर जगह आप का क़िस्सा है जहाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली

  • 20th Nov 2025

    अपनी इज़्ज़त भी यहाँ!

    शहर में सब को कहाँ मिलती है रोने की जगह,अपनी इज़्ज़त भी यहाँ हँसने हँसाने से रही| निदा फ़ाज़ली

  • 20th Nov 2025

    दूर की रौशनी !

    फ़ासला चाँद बना देता है हर पत्थर को,दूर की रौशनी नज़दीक तो आने से रही| निदा फ़ाज़ली

  • 20th Nov 2025

    पास नहीं हैं बैल, बदरा पानी दे!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह जनगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- पास नहीं हैं बैल बदरा पानी देजालिम है ट्यूवेल बदरा पानी दे। आशा है आपको यह पसंद आएगाधन्यवाद। ******

  • 20th Nov 2025

    रात जंगल में कोई!

    इस अँधेरे में तो ठोकर ही उजाला देगी,रात जंगल में कोई शम्अ जलाने से रही| निदा फ़ाज़ली

  • 20th Nov 2025

    आवाजें!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की यह कविता- यह आवाज़लोहे की चट्टानों परचुम्बक के जूते पहन करदौड़ने की आवाज़ नहीं है यह कोलाहल और…

  • 19th Nov 2025

    ज़िंदगी रोज़ तो!

    चंद लम्हों को ही बनती हैं मुसव्विर आँखें, ज़िंदगी रोज़ तो तस्वीर बनाने से रही| निदा फ़ाज़ली

  • 19th Nov 2025

    दिन सलीक़े से उगा!

    दिन सलीक़े से उगा रात ठिकाने से रही,दोस्ती अपनी भी कुछ रोज़ ज़माने से रही| निदा फ़ाज़ली

  • 19th Nov 2025

    सितारे ये ख़बर लाए!

    सितारे ये ख़बर लाए कि अब वो भी परेशाँ हैं,सुना है उन को नींद आती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ| अनवर मिर्ज़ापुरी

  • 19th Nov 2025

    घटा जो दिल से उठती

    घटा जो दिल से उठती है मिज़ा तक आ तो जाती है, मगर आँख उस को बरसाती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ| अनवर मिर्ज़ापुरी

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