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अधर में आ गया हूँ!
ज़मीं उछाल चुकी आसमाँ ने थामा नहीं, मैं काएनात में बिल्कुल अधर में आ गया हूँ| राजेश रेड्डी
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सर में आ गया हूँ!
कुछ इस क़दर मैं ख़िरद* के असर में आ गया हूँ, सिमट के सारा का सारा ही सर में आ गया हूँ| *चतुराई राजेश रेड्डी
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रक्तमुख!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिन्दी कवि स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी की यह कविता – कुपथ कुपथ रथ दौड़ाता जोपथ निर्देशक वह है, लाज लजाती जिसकी कृति सेधृति उपदेश वह…
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लोगों ने साथ निभाया है
इतने दिन एहसान किया दीवानों पर, जितने दिन लोगों ने साथ निभाया है| साहिर लुधियानवी
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दिल ही काम आया है!
अव्वल अव्वल जिस दिल ने बर्बाद किया, आख़िर आख़िर वो दिल ही काम आया है| साहिर लुधियानवी
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यह लिखा है पुस्तक में – रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…
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पैदाइश के दिन से!
पैदाइश के दिन से मौत की ज़द में हैं, इस मक़्तल में कौन हमें ले आया है| साहिर लुधियानवी
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इंसाँ का ख़ूँ बहाया है!
झूट तो क़ातिल ठहरा इस का क्या रोना, सच ने भी इंसाँ का ख़ूँ बहाया है| साहिर लुधियानवी
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ख़ुशियों का लोभ न दो!
हम को इन सस्ती ख़ुशियों का लोभ न दो, हम ने सोच समझ कर ग़म अपनाया है| साहिर लुधियानवी
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दुख की धूप के आगे!
सदियों से इंसान ये सुनता आया है, दुख की धूप के आगे सुख का साया है| साहिर लुधियानवी