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नयनों की रेशम डोरी से!
आज एक बार फिर मैं एक प्रमुख राष्ट्रीय कवि तथा भारत के स्वाधीनता संग्राम और गांधी जी के विषय में अनेक महत्वपूर्ण रचनाएं लिखने वाले स्वर्गीय सोहनलाल द्विवेदी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| द्विवेदी जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सोहनलाल द्विवेदी…
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कारोबार में हूँ भी नहीं भी हूँ!
मैं अपने इख़्तियार में हूँ भी नहीं भी हूँ, दुनिया के कारोबार में हूँ भी नहीं भी हूँ| निदा फ़ाज़ली
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मस्जिद की अज़ाँ से सुनिए!
चाँद में कैसे हुई क़ैद किसी घर की ख़ुशी, ये कहानी किसी मस्जिद की अज़ाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली
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आब-ए-रवाँ से सुनिए!
कौन पढ़ सकता है पानी पे लिखी तहरीरें, किस ने क्या लिक्खा है ये आब-ए-रवाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली
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अपने ही मकाँ से सुनिए!
क्या ज़रूरी है कि हर पर्दा उठाया जाए, मेरे हालात भी अपने ही मकाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली
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मेरी ज़बाँ से सुनिए!
चाँद से फूल से या मेरी ज़बाँ से सुनिए, हर जगह आप का क़िस्सा है जहाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली
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रात-रात भर जब आशा!
आज एक बार फिर मैं अपने ज़माने में काव्य मंचों पर अपने गीतों के माध्यम से धूम मचाने वाले स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| निर्धन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी का यह गीत…
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उसी बेवफ़ा की बात करें!
वफ़ा-शिआर कई हैं कोई हसीं भी तो हो, चलो फिर आज उसी बेवफ़ा की बात करें| साहिर लुधियानवी
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किस ख़ुदा की बात करें!
हर एक दौर का मज़हब नया ख़ुदा लाया, करें तो हम भी मगर किस ख़ुदा की बात करें| साहिर लुधियानवी