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देवता मंदिर से निकले!
देवियाँ पहुँचीं थीं अपने बाल बिखराए हुए, देवता मंदिर से निकले और पुजारी हो गए| राहत इंदौरी
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बाप हाकिम था मगर!
फ़ैसले लम्हात के नस्लों पे भारी हो गए, बाप हाकिम था मगर बेटे भिकारी हो गए| राहत इंदौरी
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एक चिड़िया आई!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि श्री अनूप अशेष जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अनूप अशेष जी की यह कविता – जिस दिन मेरे घरएक चिड़ियाआई पंख फुलाए। मैंने देखा वह दिनमेरे मन…
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उत्खनन!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी नवगीत के पुरोधा स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का यह नवगीत – उत्खनन किया है मैंने गहराई तक अतीत का । सिन्धु-सभ्यता से अब तकमुझको एक…