-
फागुन!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ जी का यह नवगीत – अरे ओ निरगुन फागुन मास!मेरे कारागृह के शून्य अजिर में मत कर…
-
अजब मुसाफ़िर हूँ मैं!
अजब मुसाफ़िर हूँ मैं मेरा सफ़र अजीब, मेरी मंज़िल और है मेरा रस्ता और| राजेश रेड्डी
-
किया ज़माने ने मुझ को!
सच कहने पर ख़ुश होना तो दूर रहा, किया ज़माने ने मुझ को शर्मिंदा और| राजेश रेड्डी
-
मुझ में जाने क्या क्या और!
दरवाज़े के अंदर इक दरवाज़ा और, छुपा हुआ है मुझ में जाने क्या क्या और| राजेश रेड्डी
-
बारिश में घर लौटा कोई!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ व्यंग्य कवि और गीतकार स्वर्गीय कैलाश गौतम जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय कैलाश गौतम जी का यह नवगीत – बारिश में घर लौटा कोई दर्पण देख रहा न्यूटन जैसे पृथ्वी का आकर्षण देख…
-
न रख पाए ज़बाँ अपनी ख़मोश!
हम न रख पाए ज़बाँ अपनी ख़मोश, सर तो जाना ही था सर जाने दिया| राजेश रेड्डी