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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th May 2024

    फागुन!  

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ जी  की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ जी का यह नवगीत – अरे ओ निरगुन फागुन मास!मेरे कारागृह के शून्य अजिर में मत कर…

  • 13th May 2024

    कोई कहाँ है लेकिन!

    औरों जैसे और न जाने कितने हैं, कोई कहाँ है लेकिन मेरे जैसा और|      राजेश रेड्डी

  • 13th May 2024

    अजब मुसाफ़िर हूँ मैं!

    अजब मुसाफ़िर हूँ मैं मेरा सफ़र अजीब, मेरी मंज़िल और है मेरा रस्ता और| राजेश रेड्डी

  • 13th May 2024

    किया ज़माने ने मुझ को!

    सच कहने पर ख़ुश होना तो दूर रहा, किया ज़माने ने मुझ को शर्मिंदा और| राजेश रेड्डी

  • 13th May 2024

    लगता है और ज़रा सा और!

    कभी तो लगता है जितना है काफ़ी है, और कभी लगता है और ज़रा सा और| राजेश रेड्डी

  • 13th May 2024

    पार है इक सन्नाटा और!

    कोई अंत नहीं मन के सूने-पन का, सन्नाटे के पार है इक सन्नाटा और| राजेश रेड्डी

  • 13th May 2024

    मुझ में जाने क्या क्या और!

    दरवाज़े के अंदर इक दरवाज़ा और, छुपा हुआ है मुझ में जाने क्या क्या और| राजेश रेड्डी

  • 13th May 2024

    बारिश में घर लौटा कोई!  

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ व्यंग्य कवि और गीतकार स्वर्गीय कैलाश गौतम जी  का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय कैलाश गौतम जी का यह नवगीत – बारिश में घर लौटा कोई      दर्पण देख रहा      न्यूटन जैसे पृथ्वी का      आकर्षण देख…

  • 12th May 2024

    न रख पाए ज़बाँ अपनी ख़मोश!

    हम न रख पाए ज़बाँ अपनी ख़मोश, सर तो जाना ही था सर जाने दिया| राजेश रेड्डी

  • 12th May 2024

    तूफ़ाँ को गुज़र जाने दिया!

    सर छुपाया अपना अपने आप में, और तूफ़ाँ को गुज़र जाने दिया| राजेश रेड्डी

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