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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 3rd Jun 2024

    यह पावस की सांझ रंगीली!

    आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी गीत के शिखर पुरुष और अपने गीतों से  श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| बच्चन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का यह गीत –…

  • 2nd Jun 2024

    बना के चाँद उसे!

    वो एक ख़्वाब जो चेहरा कभी नहीं बनता, बना के चाँद उसे आसमान में रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 2nd Jun 2024

    ये एहतियात भी!

    जो देखती हैं निगाहें वही नहीं सब कुछ, ये एहतियात भी अपने बयान में रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 2nd Jun 2024

    जो खो गया है उसे भी!

    जो साथ है वही घर का नसीब है लेकिन, जो खो गया है उसे भी मकान में रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 2nd Jun 2024

    मंज़िल गुमान में रखना

    सफ़र को जब भी किसी दास्तान में रखना, क़दम यक़ीन में मंज़िल गुमान में रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 2nd Jun 2024

    नवीन कल्पना करो!

    आज एक बार फिर से मैं, किसी समय हिन्दी काव्य मंचों पर धूम मचाने वाले कवि स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नेपाली जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी का यह गीत – निज राष्ट्र…

  • 1st Jun 2024

    ख़ुद इश्क़ की नज़रों में

    अल्फ़ाज़ में इज़हार-ए-मोहब्बत के तरीक़े, ख़ुद इश्क़ की नज़रों में भी मायूब रहे हैं| जाँ निसार अख़्तर

  • 1st Jun 2024

    कुछ और भी चेहरे!

    हम भी तिरी सूरत के परस्तार हैं लेकिन, कुछ और भी चेहरे हमें मर्ग़ूब रहे हैं| जाँ निसार अख़्तर

  • 1st Jun 2024

    जो दर्द किसी नाम से!

    उन को न पुकारो ग़म-ए-दौराँ के लक़ब से, जो दर्द किसी नाम से मंसूब रहे हैं| जाँ निसार अख़्तर

  • 1st Jun 2024

    कहीं डूब रहे हैं!

    तूफ़ान की आवाज़ तो आती नहीं लेकिन, लगता है सफ़ीने से कहीं डूब रहे हैं| जाँ निसार अख़्तर

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