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यह पावस की सांझ रंगीली!
आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी गीत के शिखर पुरुष और अपने गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| बच्चन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का यह गीत –…
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जो खो गया है उसे भी!
जो साथ है वही घर का नसीब है लेकिन, जो खो गया है उसे भी मकान में रखना| निदा फ़ाज़ली
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मंज़िल गुमान में रखना
सफ़र को जब भी किसी दास्तान में रखना, क़दम यक़ीन में मंज़िल गुमान में रखना| निदा फ़ाज़ली
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नवीन कल्पना करो!
आज एक बार फिर से मैं, किसी समय हिन्दी काव्य मंचों पर धूम मचाने वाले कवि स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नेपाली जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी का यह गीत – निज राष्ट्र…
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ख़ुद इश्क़ की नज़रों में
अल्फ़ाज़ में इज़हार-ए-मोहब्बत के तरीक़े, ख़ुद इश्क़ की नज़रों में भी मायूब रहे हैं| जाँ निसार अख़्तर
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कुछ और भी चेहरे!
हम भी तिरी सूरत के परस्तार हैं लेकिन, कुछ और भी चेहरे हमें मर्ग़ूब रहे हैं| जाँ निसार अख़्तर
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जो दर्द किसी नाम से!
उन को न पुकारो ग़म-ए-दौराँ के लक़ब से, जो दर्द किसी नाम से मंसूब रहे हैं| जाँ निसार अख़्तर
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कहीं डूब रहे हैं!
तूफ़ान की आवाज़ तो आती नहीं लेकिन, लगता है सफ़ीने से कहीं डूब रहे हैं| जाँ निसार अख़्तर