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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 4th Dec 2024

    मेरे अहद के इंसानों!

    मेरे अहद के इंसानों को पढ़ लेना कोई खेल नहीं,ऊपर से है मेल-मोहब्बत, अंदर से है खिंचाव बहुत| क़ैसर शमीम

  • 4th Dec 2024

    छुपे हुए उलझाव!

    अपने-आप में उलझी हुई इक दुनिया है हर शख़्स यहाँ,सुलझे हुए ज़ेहनों में भी हैं छुपे हुए उलझाव बहुत| क़ैसर शमीम

  • 4th Dec 2024

    सोच का है ये फेर!

    सोच का है ये फेर कि यारो पेच-ओ-ख़म की दुनिया में,ढूँड रहे हो ऐसा रस्ता जिस में नहीं घुमाव बहुत| क़ैसर शमीम

  • 4th Dec 2024

    आज दबाव बहुत!

    बहके बहके से बादल हैं क्या जाने ये जाएँ किधर,बदली हुई हवाओं का है उन पर आज दबाव बहुत| क़ैसर शमीम

  • 4th Dec 2024

    आपस के टकराव!

    होने लगे हैं रस्ते रस्ते, आपस के टकराव बहुत,एक साथ के चलने वालों में भी है अलगाव बहुत| क़ैसर शमीम

  • 4th Dec 2024

    गीतों की भाषा!

    आज मैं श्रेष्ठ हिन्दी गीतकार श्री बालस्वरूप राही जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ|   राही जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह गीत –  तुम्हीं न समझी जब मेरे गीतों की भाषादुनिया सौ-सौ अर्थ लगाये क्या होता है यह…

  • 3rd Dec 2024

    मोहब्बत की रिवायत!

    झुकी नज़रों से तकना और ख़मोशी से गुज़र जाना,मोहब्बत की रिवायत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना| आदिल राही

  • 3rd Dec 2024

    मैं तुझ को चाहता हूँ!

    मैं तुझ को चाहता हूँ बात ये सच है मगर फिर भी, मुझे तेरी ज़रूरत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना| आदिल राही

  • 3rd Dec 2024

    कहा भी था सियासत है!

    हुए बर्बाद तो अब आह-ओ-ज़ारी कर रहे हो तुम,कहा भी था सियासत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना| आदिल राही

  • 3rd Dec 2024

    उसे हँसने की आदत है!

    तुम्ही को देख कर वो मुस्कुराता है तो हैरत क्या,उसे हँसने की आदत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना| आदिल राही

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