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तूने शिकवा कर दिया!
वो घर आए थे ‘नज़ीर’ ऐसे में कुछ कहना न था, शुक्र का मौक़ा था प्यारे तू ने शिकवा कर दिया| नज़ीर बनारसी
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देखिए काली घटा ने!
मोहतरम पी लीजिए मौसम ने मौक़ा दे दिया, देखिए काली घटा ने उठ के पर्दा कर दिया| नज़ीर बनारसी
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इश्क़ ने जब बे-नियाज़
आप समझाने भी आए क़िबला-ओ-काबा तो कब, इश्क़ ने जब बे-नियाज़-ए-दीन-ओ-दुनिया कर दिया| नज़ीर बनारसी
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ज्ञान मार्ग और प्रेम मार्ग!
दुनिया में बहुत किस्म के लोग हैं, सबकी अपनी-अपनी विशेषताएं और कमियाँ हो सकती हैं, जिनके आधार पर विद्वान लोग उनको वर्गीकृत कर सकते हैं| मैं विद्वान नहीं हूँ, विद्वान कहलाना मेरा लक्ष्य भी नहीं है, अतः मैं ऐसा कोई प्रयास नहीं करूंगा| मुझे एक प्रसंग याद आता है, गोस्वामी तुलसीदास जी से जुड़ा हुआ,…
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तन्हा कर दिया!
बद-गुमानी को बढ़ा कर तुम ने ये क्या कर दिया, ख़ुद भी तन्हा हो गए मुझ को भी तन्हा कर दिया| नज़ीर बनारसी
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रंग उड़ाया लोगों ने!
‘मीर-तक़ी’ के रंग का ग़ाज़ा* रू-ए-ग़ज़ल पर आ न सका, ‘कैफ़’ हमारे ‘मीर-तक़ी’ का रंग उड़ाया लोगों ने| *गुलाबीपन कैफ़ भोपाली
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क़ुफ़्ल लगाया लोगों ने
नूर-ए-सहर ने निकहत-ए-गुल ने रंग-ए-शफ़क़ ने कह दी बात, कितना कितना मेरी ज़बाँ पर क़ुफ़्ल* लगाया लोगों ने| *Lock कैफ़ भोपाली