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अरुणाचल!
आज एक बार मैंहिन्दी नवगीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| शंभुनाथ जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का यह नवगीत- पर्वत से छन कर झरता है पानी,जी भर कर पियोऔर पियो । घाटी-दर-घाटी ऊपर…
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मोती का गहना!
तुझ को अपना ही लिया आख़िर निगार-ए-इश्क़ ने, ऐ उरूस-ए-चश्म ले मोती का गहना आ गया| आनंद नारायण मुल्ला
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आँसू बरहना आ गया!
लाख पर्दे इज़्तिराब-ए-शौक़ पर डाले मगर, फिर वो इक मचला हुआ आँसू बरहना आ गया| आनंद नारायण मुल्ला
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कोई भी अपना नहीं!
ज़िंदगी से क्या लड़ें जब कोई भी अपना नहीं, हो के शल धारे के रुख़ पर हम को बहना आ गया| आनंद नारायण मुल्ला
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मुझको कहना आ गया
पूछता कोई नहीं अब मुझ से मेरा हाल-ए-दिल, शायद अपना हाल-ए-दिल अब मुझ को कहना आ गया| आनंद नारायण मुल्ला
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रंज सहना आ गया!
आरज़ू को दिल ही दिल में घुट के रहना आ गया, और वो ये समझे कि मुझ को रंज सहना आ गया| आनंद नारायण मुल्ला
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वर्षगांठ से अगला दिन!
आज एक बार मैं प्रसिद्ध आधुनिक हिन्दी व्यंग्य कवि श्री अशोक वाजपेयी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| वाजपेयी जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज प्रस्तुत है श्री अशोक वाजपेयी जी की यह कविता- एक दिन औरगाँठ के आगे का,खुला हुआ कोमलता में एक और पंखुरीउज्ज्वलता में…