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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 30th Dec 2024

    रंज सहने को हमारा!

    शिकवा-ए-दर्द-ए-जुदाई पे वो फ़रमाते हैं,रंज सहने को हमारा सा जिगर पैदा कर| बेख़ुद देहलवी

  • 30th Dec 2024

    अपनी क़ुदरत से!

    मिट के भी दूरी-ए-गुलशन नहीं भाती या रब,अपनी क़ुदरत से मिरी ख़ाक में पर पैदा कर| बेख़ुद देहलवी

  • 30th Dec 2024

    आग पानी में भी!

    मुझ को रोता हुआ देखें तो झुलस जाएँ रक़ीब,आग पानी में भी ऐ सोज़-ए-जिगर पैदा कर| बेख़ुद देहलवी

  • 30th Dec 2024

    उतना तुम पर विश्वास बढ़ा!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय रामेश्वर शुक्ल अंचल जी का एक गीत  शेयर कर रहा हूँ। अंचल जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं।                      लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामेश्वर शुक्ल अंचल जी का आस्था से भरा यह गीत – बाहर के आँधी पानी से मन का तूफ़ान कहीं बढ़ कर,बाहर के…

  • 29th Dec 2024

    और सहर पैदा कर!

    सुब्ह-ए-फ़ुर्क़त तो क़यामत की सहर है या रब,अपने बंदों के लिए और सहर पैदा कर| बेख़ुद देहलवी

  • 29th Dec 2024

    मेरी नज़र पैदा कर!

    आईना देखना इस हुस्न पे आसान नहीं,पेश-तर आँख मिरी मेरी नज़र पैदा कर| बेख़ुद देहलवी

  • 29th Dec 2024

    बातों में असर पैदा!

    झूट जब बोलते हैं वो तो दुआ होती है,या इलाही मिरी बातों में असर पैदा कर| बेख़ुद देहलवी

  • 29th Dec 2024

    थम ज़रा ऐ अदम!

    थम ज़रा ऐ अदम-आबाद के जाने वाले,रह के दुनिया में अभी ज़ाद-ए-सफ़र पैदा कर| बेख़ुद देहलवी

  • 29th Dec 2024

    और जिगर पैदा कर!

    काम लेने हैं मोहब्बत में बहुत से या रब,और दिल दे हमें इक और जिगर पैदा कर| बेख़ुद देहलवी

  • 29th Dec 2024

    पहले तू अपना दहन!

    फिर हमारा दिल-ए-गुम-गश्ता भी मिल जाएगा,पहले तू अपना दहन अपनी कमर पैदा कर| बेख़ुद देहलवी

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