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हर लम्हा मुझ में!
साहिल की गीली रेत पे बच्चों के खेल सा, हर लम्हा मुझ में बनता बिखरता हुआ सा कुछ| निदा फ़ाज़ली
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रास्ता खुलता नहीं कहीं!
होता है यूँ भी रास्ता खुलता नहीं कहीं, जंगल सा फैल जाता है खोया हुआ सा कुछ| निदा फ़ाज़ली
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श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-7
मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज सातवां दिन है । इसके लिए मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने पहले भी बताया है, हमेशा ‘श्रीकृष्ण शर्मा’ नाम से रचनाएं लिखता रहा, उनका…
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चाँद में कैसे हुई क़ैद!
चाँद में कैसे हुई क़ैद किसी घर की ख़ुशी, ये कहानी किसी मस्जिद की अज़ाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली
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आब-ए-रवाँ से सुनिए!
कौन पढ़ सकता है पानी पे लिखी तहरीरें, किस ने क्या लिक्खा है ये आब-ए-रवाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली
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मोहब्बत की ज़बाँ से!
सब को आता नहीं दुनिया को सजा कर जीना, ज़िंदगी क्या है मोहब्बत की ज़बाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली
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चाँद से फूल से या!
चाँद से फूल से या मेरी ज़बाँ से सुनिए, हर जगह आप का क़िस्सा है जहाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली
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श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-6
मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज छठा दिन है, इस प्रकार जहाँ इन सबको, जितनी उपलब्ध हैं, एक साथ शेयर कर लूंगा| जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने पहले भी बताया है, हमेशा ‘श्रीकृष्ण शर्मा’ नाम…