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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Aug 2024

    पढ़ने वाला कम-नज़र!

    ‘कैफ़’ में हूँ एक नूरानी किताब, पढ़ने वाला कम-नज़र है क्या करूँ. कैफ़ भोपाली

  • 5th Aug 2024

    वो नज़र फिर वो!

    ‘कैफ़’ का दिल ‘कैफ़’ का दिल है मगर, वो नज़र फिर वो नज़र है क्या करूँ, कैफ़ भोपाली

  • 5th Aug 2024

    पाँव में ज़ंजीर काँटे!

    पाँव में ज़ंजीर काँटे आबले, और फिर हुक्म-ए-सफ़र है क्या करूँ. कैफ़ भोपाली

  • 5th Aug 2024

    वो तो सौ सौ मर्तबा!

    वो तो सौ सौ मर्तबा चाहें मुझे, मेरी चाहत में कसर है क्या करूँ. कैफ़ भोपाली

  • 5th Aug 2024

    फूँक दूँ इस शहर को!

    चाहता हूँ फूँक दूँ इस शहर को, शहर में इन का भी घर है क्या करूँ. कैफ़ भोपाली

  • 5th Aug 2024

    दस्त-ए-क़ातिल!

    जिस्म पर बाक़ी ये सर है क्या करूँ, दस्त-ए-क़ातिल बे-हुनर है क्या करूँ. कैफ़ भोपाली

  • 5th Aug 2024

    श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-19

    मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज उन्नीसवां दिन है, इस प्रकार जहाँ इन सबको, जितनी उपलब्ध हैं, एक साथ शेयर कर लूंगा| इसके लिए मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने पहले…

  • 4th Aug 2024

    लिखता है ग़म की बात!

    लिखता है ग़म की बात मसर्रत के मूड में, मख़्सूस है ये तर्ज़ फ़क़त ‘कैफ़’ ही के साथ. कैफ़ भोपाली

  • 4th Aug 2024

    हिकायतें न सुना!

    शा’इर हिकायतें न सुना वस्ल ओ इश्क़ की, इतना बड़ा मज़ाक़ न कर शाइरी के साथ. कैफ़ भोपाली

  • 4th Aug 2024

    सड़कों का हुस्न है!

    शाइस्तगान-ए-शहर मुझे ख़्वाह कुछ कहें, सड़कों का हुस्न है मिरी आवारगी के साथ. कैफ़ भोपाली

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