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सरिता!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी गीतकार स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। नेपाली जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी का यह गीत– यह लघु सरिता का बहता जलकितना शीतल¸ कितना निर्मल¸ हिमगिरि के हिम से निकल–निकल¸यह…
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त्राहि, त्राहि कर उठता जीवन!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी गीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। बच्चन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का यह गीत– त्राहि त्राहि कर उठता जीवन! जब रजनी के सूने क्षण में,तन-मन के एकाकीपन…
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आग का दरिया देखूँ!
टूट जाएँ कि पिघल जाएँ मिरे कच्चे घड़े,तुझ को मैं देखूँ कि ये आग का दरिया देखूँ| परवीन शाकिर
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और भी तुझ सा देखूँ!
तू मिरी तरह से यकता है मगर मेरे हबीब,जी में आता है कोई और भी तुझ सा देखूँ| परवीन शाकिर