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हम उसे और हसीं !
क्या हुआ वक़्त का दा’वा कि हर इक अगले बरस,हम उसे और हसीं और हसीं देखते हैं| अमजद इस्लाम अमजद
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तीर आया था जिधर!
तीर आया था जिधर से ये मिरे शहर के लोग,कितने सादा हैं कि मरहम भी वहीं देखते हैं| अमजद इस्लाम अमजद
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मेरा नाम राजू घराना अनाम!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में मुकेश जी का गाया फिल्म- जिस देश में गंगा बहती है, का यह प्रसिद्ध गीत शेयर कर रहा हूँ- मेरा नाम राजू घराना अनामबहती है गंगा जहाँ मेरा धाम। आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
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और कहीं देखते हैं!
जैसे मैं देखता हूँ लोग नहीं देखते हैं,ज़ुल्म होता है कहीं और कहीं देखते हैं| अमजद इस्लाम अमजद
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गुल्लक कविता की!
प्रस्तुत है आज का यह गीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- कुछ कुछ सिक्के तो डाले परगुल्लक अभी नहीं भर पाई। यह गुल्लक मेरी कविता कीरोज मांगती है कुछ फुटकरकवि की नित भंगिमा बनानामुझको लगता है अति दुष्कर,कितना नया ढूंढकर लाऊंइसकी भूख नहीं मिट पाई। इसके अजब-गजब नखरे हैंसीधा-सादा नहीं सुहातायह स्वीकार नहीं करती हैशब्द-अर्थ…
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है कल की बात ये!
वो अब जो देख के पहचानते नहीं ‘अमजद‘, है कल की बात ये लगते थे कुछ हमारे भी| अमजद इस्लाम अमजद
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ज़मीन में इक दिन!
इसी ज़मीन में इक दिन मुझे भी सोना है,इसी ज़मीं की अमानत हैं मेरे प्यारे भी| अमजद इस्लाम अमजद
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यही तो एक हवाला है!
यही तो एक हवाला है मेरे होने का,यही गिराती है मुझ को यही उतारे भी| अमजद इस्लाम अमजद
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सफ़र में साथ रहे!
प जैसे रेल में दो अजनबी मुसाफ़िर हों,सफ़र में साथ रहे यूँ तो हम तुम्हारे भी| अमजद इस्लाम अमजद
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बड़े सुकून से डूबे!
बड़े सुकून से डूबे थे डूबने वाले,जो साहिलों पे खड़े थे बहुत पुकारे भी| अमजद इस्लाम अमजद