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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Jan 2026

    सरिता!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी गीतकार स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। नेपाली जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी का यह गीत– यह लघु सरिता का बहता जलकितना शीतल¸ कितना निर्मल¸ हिमगिरि के हिम से निकल–निकल¸यह…

  • 16th Jan 2026

    मसअले हैं हम!

    क्यूँ हैं कब तक हैं किस की ख़ातिर हैं,बड़े संजीदा मसअले हैं हम| जावेद अख़्तर

  • 16th Jan 2026

    तू ने ढाला है और!

    तू तो मत कह हमें बुरा दुनिया,तू ने ढाला है और ढले हैं हम| जावेद अख़्तर

  • 16th Jan 2026

    सफ़र की दुश्वारी!

    ख़ुद हैं अपने सफ़र की दुश्वारी,अपने पैरों के आबले हैं हम| जावेद अख़्तर

  • 16th Jan 2026

    सरकती जाए है !

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में, अमीर मीनाई जी की लिखी यह ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे जगजीत सिंह जी ने गाया है- सरकती जाए है रुख से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता। आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद। ******

  • 16th Jan 2026

    ख़्वाब के गाँव में!

    ख़्वाब के गाँव में पले हैं हम,पानी छलनी में ले चले हैं हम| जावेद अख़्तर

  • 16th Jan 2026

    सुहानी चांदनी रातें !

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं मुकेश जी का यह प्रसिद्ध गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- सुहानी चांदनी रातें हमें सोने नहीं देतीं! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 16th Jan 2026

    त्राहि, त्राहि कर उठता जीवन!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी गीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। बच्चन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का यह गीत– त्राहि त्राहि कर उठता जीवन! जब रजनी के सूने क्षण में,तन-मन के एकाकीपन…

  • 15th Jan 2026

    आग का दरिया देखूँ!

    टूट जाएँ कि पिघल जाएँ मिरे कच्चे घड़े,तुझ को मैं देखूँ कि ये आग का दरिया देखूँ| परवीन शाकिर

  • 15th Jan 2026

    और भी तुझ सा देखूँ!

    तू मिरी तरह से यकता है मगर मेरे हबीब,जी में आता है कोई और भी तुझ सा देखूँ| परवीन शाकिर

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