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आँखों में रात रह जाए!
मैं सो रहा हूँ तिरे ख़्वाब देखने के लिए,ये आरज़ू है कि आँखों में रात रह जाए| शकील आज़मी
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बिछड़ भी जाएँ तो!
कुछ इस तरह से मिलें हम कि बात रह जाए,बिछड़ भी जाएँ तो हाथों में हात रह जाए| शकील आज़मी
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मेरे भारत की माटी है चंदन और अबीर!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में श्री सोम ठाकुर जी की लिखी प्रसिद्ध ‘राष्ट्र-वंदना’ प्रस्तुत कर रहा हूँ – मेरे भारत की माटी है चंदन और अबीरसौ-सौ नमन करूं मैं भैया सौ सौ नमन करूं! आशा है आपको पसंद आएगा, धन्यवाद। ********
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अमर स्पर्श!
आज एक बार फिर मैं छायावाद युग के एक प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। पंत जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की यह कविता- खिल उठा हृदय,पा स्पर्श तुम्हारा अमृत अभय! खुल गए साधना के…
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किनारे तो सभी जाएँगे!
नद्दियाँ लाशों को पानी में नहीं रखती हैं,तैरें या डूबें किनारे तो सभी जाएँगे| शकील आज़मी
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मारे तो सभी जाएँगे!
दर्द की हद से गुज़ारे तो सभी जाएँगे,जल्द या देर से मारे तो सभी जाएँगे| शकील आज़मी
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उस गली में हमें यूँ ही!
उस गली में हमें यूँ ही तो नहीं दिल की तलाश,जिस जगह खोए कोई चीज़ वहीं देखते हैं| अमजद इस्लाम अमजद