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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Dec 2025

    काएनात रह जाए!

    मैं डूब जाऊँ समुंदर की तेज़ लहरों में,किनारे रक्खी हुई काएनात रह जाए| शकील आज़मी

  • 7th Dec 2025

    आँखों में रात रह जाए!

    मैं सो रहा हूँ तिरे ख़्वाब देखने के लिए,ये आरज़ू है कि आँखों में रात रह जाए| शकील आज़मी

  • 7th Dec 2025

    तिरे बदन का कोई!

    अब इस के बा’द का मौसम है सर्दियों वाला,तिरे बदन का कोई लम्स साथ रह जाए| शकील आज़मी

  • 7th Dec 2025

    बिछड़ भी जाएँ तो!

    कुछ इस तरह से मिलें हम कि बात रह जाए,बिछड़ भी जाएँ तो हाथों में हात रह जाए| शकील आज़मी

  • 7th Dec 2025

    मेरे भारत की माटी है चंदन और अबीर!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में श्री सोम ठाकुर जी की लिखी प्रसिद्ध ‘राष्ट्र-वंदना’ प्रस्तुत कर रहा हूँ – मेरे भारत की माटी है चंदन और अबीरसौ-सौ नमन करूं मैं भैया सौ सौ नमन करूं! आशा है आपको पसंद आएगा, धन्यवाद। ********

  • 7th Dec 2025

    आसमानों से उतारे तो!

    चाहे कितनी भी बुलंदी पे चला जाए कोई,आसमानों से उतारे तो सभी जाएँगे| शकील आज़मी

  • 7th Dec 2025

    अमर स्पर्श!

    आज एक बार फिर मैं छायावाद युग के एक प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। पंत जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की यह कविता- खिल उठा हृदय,पा स्पर्श तुम्हारा अमृत अभय! खुल गए साधना के…

  • 6th Dec 2025

    किनारे तो सभी जाएँगे!

    नद्दियाँ लाशों को पानी में नहीं रखती हैं,तैरें या डूबें किनारे तो सभी जाएँगे| शकील आज़मी

  • 6th Dec 2025

    मारे तो सभी जाएँगे!

    दर्द की हद से गुज़ारे तो सभी जाएँगे,जल्द या देर से मारे तो सभी जाएँगे| शकील आज़मी

  • 6th Dec 2025

    उस गली में हमें यूँ ही!

    उस गली में हमें यूँ ही तो नहीं दिल की तलाश,जिस जगह खोए कोई चीज़ वहीं देखते हैं| अमजद इस्लाम अमजद

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