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जब-जब सिर उठाया!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। सर्वेश्वर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की यह कविता – जब-जब सिर उठायाअपनी चौखट से टकराया।मस्तक पर लगी चोट,मन में उठी कचोट, अपनी ही भूल…
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अब तो ये बात हुई!
यूँ तो पहले भी कई दोस्त दग़ा देते थे,अब तो ये बात हुई ‘आम ख़ुदा ख़ैर करे| बाल स्वरुप राही