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सदियों का इतिहास!
साँसें जितनी मौजें उतनी सब की अपनी अपनी गिनती,सदियों का इतिहास समुंदर जितना तेरा उतना मेरा| निदा फ़ाज़ली
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तुम जानो या मैं जानूँ!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी नवगीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| | शंभुनाथ जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का यह गीत – जानी अनजानी, तुम जानो या मैं जानूँ। यह रात अधूरेपन…
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आँसू सपना चाहत!
हर जीवन की वही विरासत आँसू सपना चाहत मेहनत,साँसों का हर बोझ बराबर जितना तेरा उतना मेरा| निदा फ़ाज़ली
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सब कुछ अंदर बाहर!
गेहूँ चावल बाँटने वाले झूटा तौलें तो क्या बोलें,यूँ तो सब कुछ अंदर बाहर जितना तेरा उतना मेरा| निदा फ़ाज़ली
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दुख सुख का ये जंतर!
एक ही धरती हम सब का घर जितना तेरा उतना मेरा,दुख सुख का ये जंतर-मंतर जितना तेरा उतना मेरा| निदा फ़ाज़ली
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अपने इन दुखों को!
आज एक बार फिर मैं विख्यात हिन्दी व्यंग्य लेखक और कवि स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ त्यागी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| | त्यागी जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ त्यागी जी की यह कविता – अपने इन दुखों कोबेकार मत जाने दोचेहरे के चिराग…