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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd Oct 2024

    एक इशारा दिन!

    अक़्लमंद को काफ़ी है,साहब! एक इशारा दिन| सूर्यभानु गुप्त

  • 2nd Oct 2024

    जन्मों का बंजारा दिन!

    बाँधे बँधा न दुनिया के,जन्मों का बंजारा दिन| सूर्यभानु गुप्त

  • 2nd Oct 2024

    मेरी कुछ और रचनाएं-6   

    एक बार फिर से कुछ पुरानी रचनाएं मिल गईं सोचा इनको भी ढोल पीट लेता हूँ, क्योंकि बहुत समय पहले 1980 में दिल्ली छोड़ दी थी और रचनाकर्म भी लगभग छूट ही गया था| अधिकतर सुदूर प्रोजेक्ट्स में रहा और अब 7 से अधिक वर्षों से गोवा में रह रहा हूँ, जहां साहित्यिक सपोर्ट और…

  • 1st Oct 2024

    रिश्ते आकर लौट गए!

    रिश्ते आकर लौट गए,हम-सा रहा कुँवारा दिन| सूर्यभानु गुप्त

  • 1st Oct 2024

    जोगी का इकतारा!

    चेहरा-चेहरा राम-भजन,जोगी का इकतारा दिन| सूर्यभानु गुप्त

  • 1st Oct 2024

    देखी शाम, उतारा!

    उम्मीदों ने टाई-सा,देखी शाम, उतारा दिन| सूर्यभानु गुप्त

  • 1st Oct 2024

    पेड़ों जैसे लोग कटे!

    पेड़ों जैसे लोग कटेगुज़रा आरा-आरा दिन सूर्यभानु गुप्त

  • 1st Oct 2024

    आवाज़ों का पारा दिन!

    थर्मामीटर कानों केआवाज़ों का पारा दिन सूर्यभानु गुप्त

  • 1st Oct 2024

    सड़क पर नारा दिन!

    कमरे तक एहसास रहा,हुआ सड़क पर नारा दिन| सूर्यभानु गुप्त

  • 1st Oct 2024

    नदी का धारा दिन!

    दुनिया की हर चीज़ बही,चढ़ी नदी का धारा दिन| सूर्यभानु गुप्त

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